बरेली में संक्रमण रोकने को दो दिन लॉकडाउन का फार्मूला बेअसर

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Edited By Amrit Vichar
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सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। सरकार ने कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार रोकने के लिए सप्ताह में दो दिन का लॉकडाउन लागू किया था। सरकार को उम्मीद थी कि इससे कोरोना मरीजों की बढ़ती रफ्तार पर ब्रेक लग सकेंगे। लेकिन कोरोना संक्रमण के नियंत्रण पर लॉकडाउन फिलहाल बेअसर होता दिख रहा है। जिस तेजी से कोरोना केस …

सिद्धार्थ भारद्वाज, बरेली। सरकार ने कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार रोकने के लिए सप्ताह में दो दिन का लॉकडाउन लागू किया था। सरकार को उम्मीद थी कि इससे कोरोना मरीजों की बढ़ती रफ्तार पर ब्रेक लग सकेंगे। लेकिन कोरोना संक्रमण के नियंत्रण पर लॉकडाउन फिलहाल बेअसर होता दिख रहा है। जिस तेजी से कोरोना केस बढ़ रहे हैं। उससे देखकर तो लगता है कि आने वाले दिनों में स्थिति ज्यादा खरतनाक हो सकती है।

पिछले एक सप्ताह में 241 कोरोना के सक्रिय केसों की संख्या बढ़ी है। कोरोना केस मिलने से आम लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। कुछ लोग तो संपूर्ण लॉकडाउन की बात भी कहने लगे हैं। लेकिन दूसरे लोगों का तर्क है कि जब कोरोना में वैक्सीन बाजार में नहीं आ जाएगी। तब यह सभी प्रयत्न फिलहार बेअसर ही साबित होंगे।

जुलाई में साप्ताहिक लॉकडाउन तीन बार हो चुका है। सरकार की सप्ताह में दो दिन लॉकडाउन लगाने के पीछे मंशा थी कि इससे संक्रमण की चेन टूटेगी और कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी आएगी। लेकिन, आंकड़ों के हिसाब से देखें तो जब से सप्ताह में दो दिन का लॉकडाउन लगा है। तबसे इसका असर ठीक उल्टा दिखाई दे रहा है।

जुलाई में कोरोना केसों की संख्या पर नजर डालें तो 20 जुलाई को जिले में सक्रिय केसों की संख्या केवल 461 थी जो कि 26 जुलाई को बढ़कर 702 पहुंच गई। यानी सक्रिय केसों संख्या 241 बढ़ी है। वहीं, अगर मौत की बात की जाए तो 20 जुलाई को जिले में मौत का आंकड़ां 31 था जो 26 जुलाई तक 47 पहुंच गया। एक सप्ताह में 16 मौतें हुई।

पिछले सप्ताह में रिकार्ड तोड़ बढ़े मामले
जनपद में दो वार वीकेंड लॉकडाउन के बाद भी कोरोना संक्रमण के केसों में कमी आना तो दूर की बात, मरीजों की संख्या बेतहाशा तरीके से बढ़ गई। पिछले सप्ताह रिकार्ड तोड़ केस सामने आए। बीते सप्ताह में दो बार रिकार्ड मरीज सामने आए, इसमें पहला मामला 170 मरीजों का रहा। तो वहीं रविवार को दूसरा सबसे बड़ा 123 संक्रमित मरीजों का आया। जिससे स्वास्थ्य महकमे से लेकर जिला प्रशासन के अफसरों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

नियमों की उड़ेंगी धज्जियां तो बढ़ेगा कोरोना
कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रत्येक सप्ताह शनिवार और रविवार को लॉकडाउन की घोषणा की है। लेकिन इसका पालन बीते संपूर्ण लॉकडाउन की तरह नहीं रहा। सड़कों पर दो और चार पहिया वालों पर रोक-टोक नहीं देखी गई। हालांकि प्रमुख चौराहा और मार्गों पर पुलिस रोका-टोकी कर रही है। कोई दवा का बहाना बनाकर तो कोई जरूरी काम होने की बात कहकर आवागमन कर रहा है।

प्रशासन द्वारा जारी किए आदेश के मुताबिक प्रत्येक दुकान पर आने वाले ग्राहकों की थर्मल स्क्रीनिंग होनी चाहिए। लेकिन इक्का दुक्का दुकानों को छोड़ दें, तो अधिकांश के पास थर्मल स्कैनर ही नहीं है। इसमें जितनी दोषी सरकारी मशीनरी है। उससे कहीं ज्यादा दोषी आम जनता भी है। यदि ऐसा ही हाल रहा तो लोगों को एक बार फिर संपूर्ण लॉकडाउन का दंश झेलना पड़ सकता है।

“कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तैयारी से जुटा है। सर्विलांस टीमें भी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सर्वे कर रही हैं। जनता को भी जागरूक होने की जरुरत है। जनता के सहयोग से ही कोरोना से जंग जीती जा सकती है।” -डॉ. वीके शुक्ल, सीएमओ

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