हल्द्वानी: धाकड़ नहीं, घामड़ हैं राज्य के नियंता : हरीश रावत
हल्द्वानी, अमृत विचार। पूर्व मुख्यमंत्री और अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हरीश रावत ने एक बार राज्य सरकार की कार्य प्रणाली को कटघरे में खड़ा करते न सिर्फ तंज कसा, बल्कि राज्य कांग्रेस की दुखती रग को भी छेड़ दिया। बगैर किसी का नाम लिए उन्होंने राज्य के नियंता को धाकड़ के बजाय घामड़ की उपाधि दे डाली। अब यह बात भी छिपी नहीं है कि लोग राज्य में किस नेता के लिए 'धाकड़' जैसे शब्द का उपयोग करते हैं।
बहरहाल, रामपुर रोड स्थित एक होटल में हरीश रावत अपने चिरपरिचित अंदाज में पत्रकारों से मुखातिब हुए और अपनी ही पार्टी के कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए बोले कि अब नए लोग कांग्रेस से जुड़ना नहीं चाहते और पुराने लोग निष्क्रिय पड़े हैं। उन्होंने नए लोगों को जोड़ने और पुराने लोगों को फिर से सक्रिय करने के लिए एक अभियान चलाने की जरूरत जताई। साथ ही वर्तमान पर धामी सरकार को फेल बताते हुए कहा, राज्य का पिछला साल (2022) युवाओं के लिए बेहद कष्टकारी था और अभी भी युवाओं के लिए वैसे ही हालत बने हुए हैं। इस साल जितने लोगों को नौकरी मिली, उससे दो गुना लोगों की नौकरी तथाकथित जांच के नाम पर छीन ली गई।
कहा, ऐसा लगता है कि राज्य नीतिगत कंफ्यूजन का शिकार है, जिसमें राज्य सभा भी शामिल है। यदि विधानसभा में भर्ती घोटाला हुआ और कानून की अवहेलता हुई तो इसकी सजा नौकरी चाहने वालों को क्यों दी गई। जबकि कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी जो इस घोटाले के पीछे थे, लेकिन हुआ क्या। लोग जेल गए, बाहर भी आ गए और कार्रवाई नौकरी पेशा पर हुई।
अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के घोटालों के नाम पर हजारों नौजवान, जिसको इस समय राजकीय सेवा में राज्य की सेवा करनी चाहिए थी वो भटक रहे है और अब तथाकथिक जांच के पूरा होने का इंतजार कर रहे है। इसीलिए मुझे समझ समझ में नहीं रहा कि इस राज्य के नियंता धाकड़ हैं या फिर घामड़।
आखिर उन नौजवानो की क्या गलती है, जो भटक रहे है। जबकि हाकम जैसे लोगों का साथ देने वाले लोग सरकार के ही मंत्री और नेता हैं। इस राज्य के नौजवानों को उनके परिश्रम और अच्छे सपने देखने की सजा नहीं मिलनी चाहिए। वार्ता के दौरान खजान पांडे, विजय सिजवाली, विनोद कोरंगा, राजेन्द्र क्वीरा, पुष्पा नेगी, राधा चौधरी आदि थे।
