भारत में  नहीं होगा कोरोना ज्यादा प्रभावशाली, जानें वजह

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बरेली, अमृत विचार। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ने एक बार फिर से विश्व भर में दहशत का माहौल बना दिया है। भारत भी इसको लेकर अछुता नहीं है। बरेली मंडल के पीलीभीत में एक युवक में इसकी पृष्टि होने से जिले में डर का माहौल बन गया है। इस महामारी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अलर्ट जारी कर दिया है।

वहीं इस बारे में अमृत विचार से खास बात में मारवाड़ी गंज स्थिति आराध्य ज्योतिष केन्द्र के संचालक शक्ति उपासक आचार्य रमाकांत दीक्षित ने बताया कि भारत में इस समय कोरोना की नई लहर आने की आशंका नहीं दिखती है।

दरअसल सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली को देखें तो 16 दिसंबर 2022 को सुबह 10 बजे भारतीय समयानुसार सूर्य धनु राशि में आए, तब केतु के नक्षत्र मूल में सूर्य के आने के बाद से समूची दुनिया खासकर चीन में बढ़ रहे कोरोना वायरस के मामलों को लेकर तरह-तरह की आशंका जताई जाने लगी।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से राहु-केतु के साथ युति कर रहे ग्रह और उनके नक्षत्रों में गोचर कर रहे ग्रहों के चलते वायरस यानि सूक्ष्म-जीवों से होने वाली महामारियों का योग बनता है। यह किसी बड़े ग्रहण के बाद अधिक बुरा प्रभाव दिखता है...

..अभी 8 नवंबर को लगे चंद्र ग्रहण का प्रभाव 3 महीने तक रहेगा जिसके चलते जनवरी महीने के अंत तक कोरोना वायरस को लेकर कुछ देशों में सावधानी रखनी होगी लेकिन इस समय राहत की बात यह है कि, शनि, मंगल, गुरु, राहु और केतु में से कोई भी ग्रह इस समय राहु-केतु के नक्षत्रों अश्विनी, मघा, मूल, आर्द्रा, स्वाति तथा शतभिषा में गोचर नहीं कर रहे अत: कोरोना की यह लहर बहुत नुकसानदायक नहीं होगी।

कोरोना के नए वेरिएंट का भारत पर असर जानने के लिए भारत की कुंडली देखने से मालूम होता है कि भारत की कुंडली में अभी चन्द्रमा की महादशा में केतु की अंतर्दशा चल रही है। केतु वृश्चिक राशि में सप्तम भाव में योगकारक शनि के सबसे शुभ नक्षत्र अनुराधा में है अत: भारत में कोरोना को लेकर अभी ज्यादा  डरने वाली कोई बात नहीं है।

आगे कहा कि भारत के लिए इस समय कोरोना बहुत प्रभावी नहीं दिखता है। वैसे अगले 2 महीने तक कुछ सतर्कता बनाए रखने की जरूरत है। दरअसल, केतु स्वतंत्र भारत की कुंडली में हिंसा स्थान यानी सप्तम भाव में स्थित है अत: आतंकी हिंसा, दुर्घटनाएं, अप्रिय घटनाएं तथा सत्ताधारी दल के बड़े नेताओं के स्वस्थ्य को लेकर यह समय बहुत ही संवेदनशील रहेगा। धनु संक्रांति कुंडली में मकर लग्न उदित हो रहा है जिसमें शनि सप्तम भाव को देख रहा है और सप्तमेश चंद्रमा शोक स्थान यानी अष्टम भाव में मंगल से दृष्ट है जो कुछ प्रतिकूल परिणाम दे सकता है।

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