हरभजन सिंह ने रोहित-विराट का किया खुलकर समर्थन, बोले- रन बना रहे हैं तो उम्र क्यों देखें?
2027 वनडे विश्व कप में रोहित शर्मा और विराट कोहली के खेलने को लेकर जारी बहस के बीच हरभजन सिंह ने प्रदर्शन को उम्र से ऊपर रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि फिटनेस और प्रदर्शन अच्छा है तो उम्र मायने नहीं रखती।
नई दिल्लीः भारत के पूर्व ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर चल रही बहस पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी के चयन का आधार उसकी उम्र नहीं, बल्कि प्रदर्शन और फिटनेस होना चाहिए।
पीटीआई के पॉडकास्ट साक्षात्कार में हरभजन ने कहा कि अगर रोहित और विराट लगातार रन बना रहे हैं और खेलने के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें उम्र के आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए फुटबॉल स्टार लियोनेल मेसी का उदाहरण भी दिया।
हरभजन के मुताबिक, अगर कोई खिलाड़ी उम्रदराज होने के बावजूद मैदान पर युवा खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, तो उसकी उम्र को चयन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
मेसी का उदाहरण देकर समझाया उम्र का गणित
हरभजन ने कहा कि रोहित और विराट वही कर सकते हैं जो मेसी ने हालिया फुटबॉल विश्व कप में किया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी खिलाड़ी में फिटनेस और कौशल इतना है कि कई विरोधी खिलाड़ी मिलकर भी उसे रोक नहीं पाते, तो फिर उम्र से ज्यादा महत्व उसके प्रदर्शन का होना चाहिए।
2027 के वनडे विश्व कप के समय रोहित शर्मा 40 वर्ष और विराट कोहली 39 वर्ष के हो जाएंगे। इसके बावजूद हरभजन का मानना है कि यदि दोनों उस समय तक फिट रहते हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो उनके अनुभव को टीम के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
हरभजन बोले- विराट कोहली ने बदली टीम की सोच
हरभजन ने विराट कोहली को भारतीय क्रिकेट में जीत की मानसिकता और फिटनेस संस्कृति को बढ़ावा देने का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि कोहली ने खिलाड़ियों में यह विश्वास पैदा किया कि बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
उनके मुताबिक, कोहली के कप्तान बनने के बाद भारतीय टीम की सोच में बड़ा बदलाव आया। पहले जहां आखिरी दिन 400 से ज्यादा रन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल माना जाता था, वहीं कोहली ने खिलाड़ियों को लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करने के लिए प्रेरित किया।
हरभजन ने यह भी कहा कि भारतीय क्रिकेट में फिटनेस क्रांति लाने का बड़ा श्रेय विराट कोहली को जाता है।
गौतम गंभीर को दी रोहित-विराट पर भरोसा रखने की सलाह
हरभजन ने मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि अगर वह कोच होते तो रोहित और विराट को उनके अनुभव के कारण पर्याप्त अवसर देते।
उन्होंने कहा कि रोहित और विराट के पास सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय मैचों का अनुभव है, जबकि युवा प्रतिभा वैभव सूर्यवंशी के पास अभी उतना अनुभव नहीं है। युवा खिलाड़ी तेजी से रन बना सकता है, लेकिन बड़े टूर्नामेंट में अनुभव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
हरभजन के अनुसार, फिटनेस और प्रदर्शन प्राथमिक मापदंड होने चाहिए। अगर विराट और रोहित फिट रहते हैं और रन बनाते हैं, तो केवल उम्र के आधार पर उनके बारे में फैसला नहीं किया जाना चाहिए।
हरभजन ने अपने संन्यास का भी किया जिक्र
पूर्व भारतीय स्पिनर ने अपने करियर के अनुभव को याद करते हुए कहा कि एक समय खिलाड़ी खुद महसूस करने लगता है कि शरीर अब पहले जैसी मांग पूरी नहीं कर पा रहा है।
हरभजन ने बताया कि उन्होंने आधिकारिक तौर पर दिसंबर 2021 में संन्यास लिया था, जबकि उनका आखिरी टेस्ट 2015 में श्रीलंका के खिलाफ गॉल में हुआ था। उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्हें महसूस हुआ था कि लाल गेंद के क्रिकेट को अलविदा कहने का समय करीब आ गया है।
उन्होंने कहा कि 35 वर्ष से अधिक उम्र के खिलाड़ियों से वही प्रदर्शन की उम्मीद नहीं की जा सकती जो 18-20 वर्ष की उम्र में की जाती है। अगर खिलाड़ी में आगे खेलने का साहस और क्षमता है तो उसे खेलना चाहिए, लेकिन शरीर के संकेतों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अश्विन के आने पर हरभजन को भी लेना पड़ा था फैसला
हरभजन ने रविचंद्रन अश्विन के भारतीय टीम में मजबूत ऑफ स्पिनर के रूप में उभरने के दौर को भी याद किया। उन्होंने स्वीकार किया कि अश्विन के लगातार अच्छे प्रदर्शन के सामने उन्हें वास्तविकता स्वीकार करनी पड़ी।
उनके मुताबिक, अगर उन्हें अश्विन को पीछे छोड़ना होता तो उन्हें एक बार फिर उसी स्तर की मेहनत करनी पड़ती, जैसी उन्होंने अपने शुरुआती 400 विकेट हासिल करने के दौरान की थी। उन्होंने आत्ममंथन के बाद महसूस किया कि वह ऐसा नहीं कर सकते।
2027 विश्व कप के लिए अभी से टीम तय करने के पक्ष में नहीं
हरभजन ने 2027 वनडे विश्व कप के लिए भारतीय टीम को लेकर कहा कि टूर्नामेंट में अभी समय बाकी है, इसलिए अभी टीम संयोजन को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।
हालांकि उन्होंने सुझाव दिया कि विश्व कप से करीब छह महीने पहले टीम प्रबंधन को मुख्य खिलाड़ियों और उनकी भूमिकाओं को लेकर स्पष्टता हासिल कर लेनी चाहिए, ताकि खिलाड़ियों को अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरह पता हो।
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