काशीपुर: किसानों को जापानी मिंट की खेती के बताए लाभ
काशीपुर, अमृत विचार। राज्य औषधीय पादप बोर्ड उत्तराखंड की ओर से जापानी मिंट की खेती, प्रसंस्करण एवं बाजार व्यवस्था विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान करीब 125 किसानों ने प्रतिभाग किया।
गुरुवार को ग्राम बांसखेड़ी व बाजेवाला में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिला प्रभारी शंकर लाल सागर ने कृषकों की आय दोगुनी करने का उदाहरण देते हुए जापानी मिंट की गेहूं के साथ मिश्रित खेती के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जापानी मिंट की खेती गेहूं के साथ की जाए, तो एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में 50 क्विंटल गेंहू के साथ 100 किग्रा मिंट का सुगन्धित तेल भी प्राप्त हो सकताहै। जिसकी कीमत करीब एक लाख रुपये का मुनाफा कमाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कृषक एकल फसल के रूप में भी इसकी खेती कर सकते हैं। कमल सिंह बिष्ट ने सुगंध फसलों के कृषिकरण प्रसंस्करण एवं विपणन की जानकारी देते हुए बताया कि जानवरों द्वारा कृषि फसलों को नुकसान पहुंचाया जाता है, जहां पानी का अभाव है, ढुलान की समस्या है, वहां पर सगंध फसलों की खेती लाभकारी सिद्ध होती है, क्योंकि यह फसलें कम पानी में हो जाती है। जानवर उन्हें नुकसान नहीं पहुचाते हैं। वहीं आसवन संयंत्र की मदद से फसल को सुगन्धित तेल में बदलकर ढुलान की भी कोई समस्या नहीं रहती है। बोर्ड के नरेंद्र सिंह बिष्ट ने कृषकों को बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा सगंध फसलों की खेती के प्रसार के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं चलाई जा रही है।
जिसके तहत सगंध फसलों की खेती करने वाले कृषकों को 5 नाली तक रोपण सामग्री निःशुल्क दी जाती है। आसवन संयंत्र व सोलर ड्रायर की स्थापना पर पर्वतीय क्षेत्रों में 75 प्रतिशत व मैदानी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। सगंध फसलों की 23 प्रजातियों के सुगन्धित तेल व फूलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किए गए हैं। वहां पर ग्राम प्रधान रूप सिंह, ओमप्रकाश, महावीर सिंह, बलवीर सिंह, चम्पादेवी, लक्ष्मी देवी, उषा देवी, प्रेमवती लाजवंती, कुसुम देवी आदि मौजूद रहे।
