रामनगर: G 20 - बयां करने लगी है दीवारों पर उकेरी तस्वीरें देवभूमि की संस्कृति                

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Published By Bhupesh Kanaujia
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रामनगर, अमृत विचार। जी 20 सम्मेलन में आने वाले अतिथियो को जगह जगह  उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक एवम समाजिक परिवेश का ताना बाना दीवारों पर उकेरे गए चित्रों के माद्यम से भी देखने को मिलेगा। सरकारी सम्पत्तियों पर जगह जगह शानदार वाल पेंटिंग का काम भी इस समय युद्ध स्तर पर जारी है।

जी सम्मेलन की तैयारियों के सिलसिले में रामनगर विधानसभा के अनेक क्षेत्रों की तस्वीर बदलती साफ नजर आने लगी है। कल तक  जो दीवारें सूनी सूनी दिख रही थी वह आज रंग रोगन होने के साथ साथ अलग अलग चित्रों से भर दिए जाने से सबको अपनी ओर आकर्षित करती दिखाई देने लगी है।

या यूं कहें कि बेजान दीवारों पर बने चित्रों को देखकर लगने लगा है कि जैसे यह अभी जीवंत होकर बोलने लगेंगी। इतना ही नही अभी तैयारियों का यह आधा काम हुआ है। शासन प्रसाशन पूरी तरह अतिथियो के स्वागत सत्कार के साथ साथ क्षेत्र की सुंदरता को चार चांद लगाने में कोई कसर नही छोड़ना चाहता। रामनगर से ढिकुली को जाने वाला मार्ग हो, या बाजपुर  बन्नाखेड़ा बाया बैलपड़ाव मार्ग हो, हर जगह के दिन बहुरने लगे है । रामनगर महाविद्यालय की दीवारों के बाहर खूबसूरत पेंटिंग के जरिए दर्शायी जा रही उत्तराखंड की संस्कृति ने रामनगर को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कर दिया है।

रामनगर कि शहरी जनता का सैरगाह कहे जाने वाला  कोसी बैराज अप्रत्याशित रूप से अपनी खूबसूरती में इजाफा करने जा रहा है। क्या केंद्र, क्या प्रदेश की सरकार दोनों सरकारों के आला अधिकारियों  की निगाहें रामनगर में होने वाले जी20 सम्मेलन पर टिकी है। बता दे कि इस सम्मेलन में 75 विदेशी ओर 25 भारतीयों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है।

कोसी नदी पर बने बाई पास पुल के समीप,इसमें रामनगर से ढिकुली को जाने वाले मार्ग पर जो भी अतिक्रमण था सब  हटाया गया है। बोर्ड ,होटल्स, स्कूल ,मार्ग के किनारे स्थित भवनों पर बेहतरीन रंगाई पुताई की जाने लगी है। सड़को के काया कल्प की भी तैयारी भी होने लगी है। अब लोग कहने लगे है काश ऐसे सम्मेलन रामनगर में साल में एक बार होते रहते तो कितना अच्छा होता।

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