टनकपुर: बनबसा स्टेडियम को इंतजार है काम शुरू होने का

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Edited By Amrit Vichar
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18 माह में भूमि का हस्तांतरण भी न हो सका

सितंबर 2021 में मुख्यमंत्री ने किया था ऐलान स्टेडियम के लिए चयनित की गई है o.960 हेक्टेयर जमीन

देवेन्द्र चंद्र देवा, टनकपुर, अमृत विचार। लंबे समय के अंतराल के बावजूद बनबसा के लोगों की एक अदद स्टेडियम की आस पूरी नहीं हो सकी है। यह हाल मुख्यमंत्री की घोषणा और शासनादेश जारी होने के बाद का है। अभी तक स्टेडियम का काम शुरू होना तो दूर, जमीन का हस्तांतरण भी खेल विभाग को नहीं हो सका है।

ऊधमसिंह नगर जिले की सीमा से लगा चम्पावत जिले के प्रवेशद्वार बनबसा के लिए स्टेडियम की मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक सितंबर 2021 को घोषणा की थी। ऐलान के 18 माह बाद भी चयनित जमीन पर खेल विभाग का स्वामित्व नहीं हो सका है।

प्रशासन ने बनबसा में 0.960 हेक्टेयर जमीन को स्टेडियम के लिए उपयुक्त पाते हुए चयनित किया था। लेकिन यह जमीन अभी खेल विभाग को हस्तांतरित नहीं हो सकी है। इसके चलते स्टेडियम के मूर्त रूप
लेने में देरी हो रही है। जिस जमीन को स्टेडियम के लिए चयनित किया गया है वहां क्षेत्र के युवा खेल गतिविधियां करते हैं।

 
जमीन नहीं मिलने से लटक गया चम्पावत का स्टेडियम

बनबसा के स्टेडियम के काम में तो देरी हो रही है, लेकिन चम्पावत के स्टेडियम के मामले में देर भी हो रही और अंधेर भी। जमीन नहीं मिलने से गोरलचौड़ मैदान को विस्तार दे स्टेडियम बनाने का विकल्प भी खत्म हो गया है। गोरलचौड़ मैदान से लगी सेना की जमीन की अदला-बदली के प्रयास बेनतीजा रहने से ये नौबत आई है। चम्पावत में स्टेडियम का एक नहीं तीन-तीन मुख्यमंत्रियों ने ऐलान किया था।

सबसे पहले वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी, फिर 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और वर्ष 2016 में तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने। लेकिन तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा भी जमीन नहीं मिलने से जमीनी रूप नहीं ले सकी।

गोरलचौड़ मैदान के पास की सेना की 77 नाली जमीन खेल विभाग को हस्तांतरित करने की कवायद अदलाबदली की कोशिश बेनतीजा रहने से मामला आगे नहीं बढ़ सका। बाद में सेना की ओर से मैदान से लगी अपनी जमीन पर सेना के स्वामित्व के साइनबोर्ड लगा दिए गए हैं। उप जिला क्रीड़ाधिकारी चंदन सिंह बिष्ट का कहना है कि जमीन नहीं मिल पाने से चम्पावत के स्टेडियम में अड़ंगा लग रहा है।

 

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