Kanpur News: सियासत का सारस कभी इस डाल पे तो कभी उस डाल पे, अखिलेश जिससे मिलते, भाजपा उसे मान लेती दुश्मन

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Edited By Amrit Vichar
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सियासत का सारस कभी इस डाल पे तो कभी उस डाल पे।

सियासत का सारस कभी इस डाल पे तो कभी उस डाल पे। अखिलेश जिससे मिलते हैं, उसे भाजपा दुश्मन मान लेती है। सपा की जिला इकाई सारस को देखने प्राणि उद्यान जाएगी। अखिलेश को सारस की रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

कानपुर, अमृत विचार। इन दिनों की राजकीय पक्षी सारस को लेकर सूबे की सियासत गरम है। सियासत का यह सारस कभी इस डाल तो कभी उस डाल पर होते हुए अब कानपुर प्राणि उद्यान में आकर बैठ गया है। इसे अमेठी के एक किसान आरिफ ने घायल अवस्था में घर लाकर इलाज किया और उसे दाना-पानी दिया करता था। पक्षी और इंसानी रिश्ते के कारण चर्चा में आया सारस को वन विभाग आरिफ से लेकर रायबरेली के समसपुर पक्षी विहार लाया। वहां से लखननऊ लाया जाना था पर अचानक कानपुर लाने का फैसला लेते हुए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने इसे कानपुर प्राणि उद्यान ले जाने को कहा। सियासी लोग कहते हैं कि सारस यदि लखनऊ में रहा तो बयानबाजी तेज हो सकती है।  

घायल सारस को खेत से उठाकर घर पर लाकर इलाज करने और दानापानी देने के कारण किसान आरिफ से उसकी दोस्ती सी हो गयी और वह पक्षी और इंसानी रिश्ते की अनकही कहानी बन गया। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर सियासत करते हुए आरिफ से मुलाकात की थी। वन विभाग सारस को आरिफ से लेकर समसपुर पक्षी विहार में रखा तो अखिलेश ने उसके गायब होनी बात कहते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा।

हालांकि वन विभाग जवाब देता रहा कि सारस सुरक्षित है, आकर देख लें। दूसरी तरफ भाजपा के मंत्री और अन्य नेता कहते रहे कि सपा अध्यक्ष अखिलेश के पास जनता से जुड़े मुद्दे खतम हो गए। सपा ने सारस को लेकर हल्ला बोल तक की बात कह दी। राजकीय पक्षी सारस को घर में रखना व पालना जुर्म है। सपा को अंदेशा है कि वन्यजीव सरंक्षण कानून के तहत आरिफ पर कार्रवाई हो सकती है। सपा के कानपुर अध्यक्ष डा.इमरान का कहना है कि कुदरत और इंसानी रिश्ते आरिफ और सारस एक कहानी है।

भाजपा सरकार तो हर उस व्यक्ति को प्रताड़ित करने लगती है जिससे सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मिल भर लें। सारस पर सियासत समाजवादी पार्टी नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी कर रही है। सपा के लोग सारस को देखने के लिए कानपुर प्राणि उद्यान जाएंगे।

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