ऑटिज्म बच्चों को अपनी बात कहना सिखाएगा रोबोट नाओ, Kanpur IIT के विशेषज्ञों ने फ्रांस से मंगवाया
कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञों ने फ्रांस से रोबोट नाओ मंगवाया।
कानपुर आईआईटी के विशेषज्ञों ने फ्रांस से रोबोट नाओ मंगवाया। ऑटिज्म बच्चों को अपनी बात कहना रोबोट नाओ सिखाएगा। भारतीय भाषाओं में कोडिंग, फंक्शन में बदलाव हो रहा।
कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। सामान्य बच्चों की तरह ऑटिज्म की समस्या से जूझ रहे बच्चों को अपनी बात कहना, भाव दर्शना मुश्किल होता है। वह अन्य बच्चों के साथ आसानी से घुल मिल नहीं पाते हैं। घरवालों के साथ उनका व्यवहार कुछ अलग रहता है। ऐसे विशेष तरह के बच्चों की समस्या को दूर करने के लिए आईआईटी के विशेषज्ञ आगे आए हैं।
यहां के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. विशाख भट्टाचार्य और ह्यूमैनिटी एंड सोशल साइंस के प्रो. ब्रज भूषण की टीम खास तरह का रोबोट विकसित कर रही है। यह ऑटिज्म बच्चों के साथ दोस्ती बढ़ाएगा और उन्हें विभिन्न तरह का प्रशिक्षण देगा। इस कार्य में फ्रांस की कंपनी सहयोग कर रही है। नाओ नाम का रोबोट इंसानों के घुटने के बराबर की लंबाई का है। इसमें कोडिंग और फंक्शन हिंदी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं के साथ तैयार किया जा रहा है। इसके बातचीत और व्यवहार का तरीका भारतीय बच्चों की तरह रहेगा।
प्रो. ब्रज भूषण ने बताया कि ऑटिज्म एक तरह की न्यूरो संबंधी समस्या है। इसकी पहचान तीन साल की उम्र से हो सकती है, लेकिन कई बार माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य इससे अनभिज्ञ रहते हैं। ऐसे बच्चों को पढ़ाई करने, लिखने और बोलने में कठिनाई होती है। कई बार अपनी भावना को दूसरों के सामने प्रकट भी नहीं कर पाते हैं। इस समस्या को देखते हुए संस्थान ने कार्य शुरू कर दिया है।
अभी बच्चों की भावना समझ रहा रोबोट
प्रो. विशाख के मुताबिक अभी रोबोट बच्चों की भावनाओं और स्वभाव को समझ रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग के साथ ही कई तरह के सेंसर लगे हुए हैं। केंद्रीय विद्यालय, कैंपस स्कूल समेत अन्य स्कूलों के बच्चों को रोबोट के मिलवाया जा रहा है। इसमें लगे सेंसर बच्चों की आदत, भावना और तरीके को रीड कर रहे हैं। यह सब रोबोट में स्टोर हो जा रहा है। यह डेटा बच्चों की शरीरिक बनावट को एक्स, वाई और जेड एक्सिस में अलग कर रहा है, जिससे ऑटिज्म बच्चों की पहचान करना आसान हो जाएगा।
खुश होना, दुखी होना, खतरे का आभास कराएगा
प्रो. ब्रज भूषण ने बताया कि ऑटिज्म से जूझ रहे बच्चों को नाओ रोबोट खुश होना, दुखी होना, खतरे का आभास करना सिखाएगा। किस समय खुश होना चाहिए, कब चौंकना चाहिए, दुखी होने पर अपनी भावना कैसे व्यक्त की जाती है, यह सब बताएगा। ऑटिज्म बच्चों को निर्जिव चीजें बेहद पसंद आती हैं। इसमें रोबोट बेहतर साधन होता है। उसको बोलते, नाचते और चलते हुए देखकर अच्छा लगता है।
