हल्द्वानी: तराई के जंगलों में वन्यजीवों की प्यास बुझाने को बनाए गए तालाब

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Edited By Amrit Vichar
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तराई के जंगलों में वन्यजीवों की प्यास बुझाने को बनाए 200 तालाब

तराई पूर्वी वन डिवीजन में हल्द्वानी से नेपाल बॉर्डर तक बने मानव निर्मित तालाब 

हल्द्वानी, अमृत विचार। वन विभाग ने इस साल भीषण गर्मी को देखते हुए तराई के जंगलों में वन्यजीवों की प्यास बुझाने को 200 से अधिक तालाब बनाए हैं। 

तराई पूर्वी वन डिवीजन में 9 वन रेंज और क्षेत्रफल 82,489 हेक्टेयर हैं। इस डिवीजन के जंगल नैनीताल जिले से लेकर ऊधमसिंह नगर में उत्तर प्रदेश और नेपाल बॉर्डर तक फैले हुए हैं। तराई के जंगलों में हाथी कॉरिडोर भी है, जहां से गजराज कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से तराई से होते हुए नेपाल तक आवाजाही करते हैं।

तराई के जंगलों में बाघ, तेंदुओं के साथ ही हिरन, घुरड़, हाथी, चीतल, सांभर बड़ी संख्या में वन्यजीव मौजूद हैं। वहीं, पक्षियों की भी 190 से अधिक प्रजातियां हैं। इधर, गर्मी का असर सबसे ज्यादा तराई के जंगलों पर ही होता है। यहां नदी, तालाब, पोखर आदि जल स्रोतों के सूखने के साथ ही वनाग्नि की घटनाएं भी होती हैं।

इस साल मौसम विज्ञानियों ने भी भीषण गर्मी की चेतावनी दी है। आगामी हीट वेव को देखते हुए वन विभाग ने तराई के जंगलों में तालाब बनाए हैं ताकि गर्मी में प्राकृतिक जल स्रोत सूखने पर वन्यजीव अपनी प्यास बुझा सकें। जंगलों में 200 से अधिक मानव निर्मित तालाब बनाए गए हैं। इन तालाबों में पानी भर दिया गया है इसकी नियमित निगरानी भी की जा रही है।

 
यह होंगे फायदे 

1.भूजल स्तर रिचार्ज होने में मदद मिलेगी
2.जंगलों में नमी बनेगी जो वनाग्नि की रोकथाम में होगी मददगार
3.जंगलों में पानी मिलने पर वन्यजीव आबादी की ओर रुख नहीं करेंगे और मानव वन्यजीव टकराव भी कम होगा


"तराई पूर्वी वन डिवीजन में 200 से अधिक तालाब बन गए हैं। भीषण गर्मी को देखते हुए ये तालाब बनाए हैं ताकि वन्यजीव अपनी प्यास जंगलों में ही बुझा सकें। मानव वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के साथ ही कई फायदे होंगे।"
-संदीप कुमार, डीएफओ, तराई पूर्वी वन डिवीजन, हल्द्वानी

 

 

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