रुद्रपुर: 24 अप्रैल को 12 साल बाद सबसे कम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस

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Edited By Amrit Vichar
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बीरेन्द्र बिष्ट, रुद्रपुर। कुमाऊं में 12 साल बाद अप्रैल माह में 24 अप्रैल को सबसे कम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं, वर्ष 2022 में सबसे अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा, जबकि वर्ष 2021 में सबसे अधिक 33 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने इसका कारण पश्चिमी विक्षोभ और पूर्व से आ रही हवाओं में नमी की मात्रा अधिक होना बताया है।

दरअसल, अप्रैल माह के शुरूआती दिनों में बेमौसमी बारिश से तापमान में थोड़ी कमी आयी थी। इसके बाद 15 अप्रैल से लगातार तापमान में वृद्धि हो रही थी। लगातार गर्मी से अधिकतम तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वहीं अचानक विगत दिनों पहाड़ के ऊंचाई वाले इलाकों में हो रही बर्फबारी और बारिश से एक बार फिर तापमान में गिरावट आयी है। अप्रैल माह में पिछले 12 साल बाद पहली बार 24 अप्रैल को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस में पहुंच गया है।
जीबी पंत विश्वविद्यालय के आंकड़ों को गौर करें तो वर्ष 2011 में कुमाऊं में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस रहा। इसी तरह वर्ष 2012 में अधिकतम तापमान 36, 2013 में 32.8, 2014 में 36, 2015 में 36.8, 2016 में 36.8, 2017 में 36.7, 2018 में 35, 2019 में 36, 2020 में 34.5, 2021 में अधिकतम तापमान 33 और वर्ष 2022 में अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं न्यूनतम तापमान विगत 12 वर्षों में औसत 15.5 के आसपास रहा है।

तराई में सात डिग्री सेल्सियस कम हुआ तापमान
रुद्रपुर। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से लगातार तापमान में हो रही वृद्धि से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। वहीं, अब अचानक हुई तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस की कमी से लोगों ने राहत की सांस ली है। जीबी पंत विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिकों ने अभी दो-तीन इसी के आसपास तापमान रहने की संभावना जतायी है। उन्होंने बताया कि सोमवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस रहा है। वहीं, वातावरण में नमी की मात्रा 35 फीसदी रही, जबकि दक्षिण पूर्व से 10.5 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। मौसम वैज्ञानिकों ने अभी दो-तीन इसी तरह के मौसम की संभावना जतायी है।

कुमाऊं में 12 साल के बाद 24 अप्रैल को अधिकतम तापमान सबसे कम 28 डिग्री सेल्सियस पहुंचा है। इसका कारण पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ के ऊंचाई वाले इलाकों में हो रही बर्फबारी और बारिश है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी की ओर से आ रही पूर्वी हवाओं में नमी की मात्रा अधिक होना है।
- डॉ.आरके सिंह, मौसम वैज्ञानिक, जीबी पंत विश्वविद्यालय

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