अयोध्या निकाय चुनाव 2023: ...यहां भाजपा की बुरी हार के क्या मायने?
अयोध्या/अमृत विचार। भले ही नगर निगम में महापौर बीजेपी का प्रत्याशी बना हो, लेकिन दीपोत्सव वाले स्थल पर समाजवादी पार्टी का पार्षद प्रत्याशी बाजी मार ले गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां पर (लक्ष्मण घाट वार्ड) दीपोत्सव का भव्य आयोजन करते हैं। लाखों दीप जलाए जाते हैं। वहां जब पार्षद का चुनाव हुआ तो समाजवादी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल कर ली।चुनाव जब नजदीक आया तो पार्षद महेंद्र शुक्ला ने आनन-फानन में कोर्ट मैरिज शादी भी कर ली थी।
आरक्षण की वजह से चुनाव में देरी हुई, लेकिन फिर भी महेंद्र शुक्ला ने संकल्प लिया था कि पार्षद का चुनाव उनकी पत्नी ही लड़ेंगी। अब उनकी पत्नी पार्षद बन गई हैं। पार्षद प्रतिनिधि महेंद्र शुक्ला ने बताया कि लगभग 1189 वोट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। दूसरी बार जनता का सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। पार्षद प्रिया शुक्ला ने बताया कि वह अपने पति के साथ बढ़-चढ़कर काम करेंगी।
सबसे प्रमुख मणिरामदास छावनी वार्ड जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और नव निर्वाचित मेयर गिरीशपति त्रिपाठी का तीन कलश मंदिर आता है और यहीं पर सीएम ने अंतिम दौर में साधु-संतों और प्रबुद्ध जनों को सम्मेलन में साधा था।
इस वार्ड में भाजपा को निर्दल प्रत्याशी आभा पांडेय ने हराया। भाजपा यहां तीसरे नंबर पर गई। वहीं अभिरामदास वार्ड पर जहां भाजपा के पार्षद टिकट को लेकर खासी कचकच हुई थी यहां भी निर्दल प्रत्याशी सुल्तान अंसारी जीत गए। भाजपा यहां भी तीसरे नंबर पर गई।
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