क्यों पानी में डूब रहा है जकार्ता? जानिए वजह

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

जकार्ता। सुनने में भले ही अजीब लगे लेकिन यह तथ्य है कि इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता धीरे धीरे पानी में डूब रहा है। कुछ स्थानों में भू अवतलन प्रतिवर्ष 20 सेंटीमीटर है। समुद्र तल 0.5 सेंटीमीटर प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। इस प्रकार से भू अवतलन यानी जमीन के धंसने की दर समुद्र तल के बढ़ने से कहीं अधिक है। भूमि का डूबना तथा समुद्र तल का बढ़ना, पूरी तरह से बाढ़ के खतरे को बढ़ाता है। यहां पिछले दशकों में बाढ़ आने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। वर्ष 1892 में बाढ़ की केवल दो घटनाएं थीं लेकिन 1960 तक इनकी संख्या बढ़कर पांच तक हो गई।

वर्ष 2010 से घटनाएं बढ़कर 10 तक पहुंच गईं। इसका हालांकि वर्षा से संबंध नहीं है क्योंकि 1860 से 2007 के बीच मासिक वर्षा के आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं। इस प्रकार जकार्ता में बाढ़ जोखिम की बढ़ती प्रवृत्ति के लिए जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश के बदलते क्रम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अभियंताओं तथा भूवैज्ञानिकों ने जकार्ता के डूबने के लिए जिम्मेदार कम से कम चार कारकों का पता लगाया है। इनमें भूजल का बेतहाशा दोहन, इमारतों का बढ़ता बोझ, पूरे शहर को बनाने वाली तलछटी मिट्टी का संघनन तथा विवर्तनिक (टैक्टॉनिक) गतिविधियां मुख्य रूप से शामिल हैं।

इन चारों में भी दो कारण अहम हैं। पहला है भूजल का बेतहाशा दोहन तथा इमारतों का बोझ। भूजल दोहन तथा अवतलन के बीच सीधा संबंध है। वर्ष 1879 में शहर में 42 भूजल कुंए थे वहीं 1968 में इनकी संख्या बढ़कर 352 हो गई। इसका तात्पर्य है कि 89 वर्ष में भूजल से जुड़े कुंए तीन गुना बढ़े हैं क्योंकि जल की आवश्यकता बढ़ी है। वहीं 1998 तक जकार्ता में पंजीकृत 3,626 भूजल कुंए थे।

शहर में भू अवतलन की समस्या 1970 से है और यही वह अवधि है जब पंजीकृत भूजल कुओं की संख्या सर्वाधिक हुई है। भू अवतलन का दूसरा प्रमुख करण है इमारतों का बोझ। जकार्ता में इमारतों तथा अन्य संरचनाओं का निर्माण क्षैतिज रूप में तेजी से बढ़ा है। जकार्ता में 1770 से 1960 के बीच आधुनिक योजनाबद्ध निर्मित इलाका 17.7 प्रतिशत तक बढ़ा। लेकिन 2014 तक आधुनिक योजनाबद्ध निर्मित इलाका शहर के कुल हिस्से का 83.7 प्रतिशत हो गया। इसका तात्पर्य है कि करीब पांच दशक में यह 65.5 प्रतिशत तक बढ़ा है। देश में अलग अलग सरकारों के कार्यकाल में, विकास के तरीके भी अलग अलग रहे लेकिन आबादी बढ़ने के कारण इमारतों का बोझ बढ़ता गया तथा हरियाली खत्म होती गई। अब जकार्ता धीरे धीरे नीचे जा रहा है।

ये भी पढ़ें :  DK Shivakumar Birthday: 1989 से अब तक नहीं हारे कोई चुनाव, जानें उनसे जुड़ी खास बातें

 

संबंधित समाचार