बैंक समझौते से निपटा सकते हैं इरादतन चूक के मामलेः RBI

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Edited By Amrit Vichar
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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दबाव वाली संपत्तियों से अधिकतम वसूली सुनिश्चित करने के लिए बैंकों को धोखाधड़ी वाले खातों और इरादतन या जानबूझकर चूक के मामलों का निपटारा समझौते के जरिये करने की मंजूरी दे दी है।

आरबीआई ने एक अधिसूचना में धोखाधड़ी वाले खातों और कर्ज अदायगी में इरादतन चूक के मामलों में समझौता करने की मंजूरी देते हुए कहा है कि इसके लिए निदेशक-मंडल के स्तर पर नीतियां बनानी होंगी। इस संबंध में कुछ जरूरी शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

इन शर्तों में कर्ज की न्यूनतम समयसीमा, जमानत पर रखी गई संपत्ति के मूल्य में आई गिरावट जैसे पहलू भी शामिल होंगे। बैंकों का निदेशक-मंडल इस तरह के कर्जों में अपने कर्मचारियों की जवाबदेही की जांच के लिए भी एक प्रारूप तय करेगा।

अधिसूचना के मुताबिक, रिजर्व बैंक से विनियमित वित्तीय इकाइयां इरादतन चूककर्ता या धोखाधड़ी के रूप में वर्गीकृत खातों के संबंध में ऐसे देनदारों के खिलाफ जारी आपराधिक कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बगैर समझौता समाधान या तकनीकी बट्टे-खाते में डाल सकती हैं।

समाधान नीति में बैंक एक गणना-पद्धति भी निर्धारित करेगा ताकि जमानत पर रखी गई संपत्ति के वसूली-योग्य मूल्य की गणना की जा सके। इससे यह तय हो पाएगा कि संकटग्रस्त कर्जदार से न्यूनतम खर्च पर अधिकतम कितनी वसूली हो पाएगी।

इसके मुताबिक, विनियमित इकाइयों के बहीखाते में चिह्नित ऐसे किसी भी वसूली दावे को मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार पुनर्गठित कर्ज माना जाएगा। इसके अलावा समझौते से समाधान होने की स्थिति में संबंधित देनदार को नया कर्ज देने का कूलिंग पीरियड रखा जाएगा, ताकि बैंकों के जोखिम को कम किया जा सके। कृषि ऋणों से इतर कर्जों में यह अवधि 12 महीनों की हो सकती है।

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