Chitrakoot: तो तोड़ान बंद और जारी है तेंदू पत्ता की कालाबाजारी, वन निगम और जीआरपी-आरपीएफ मढ़ रहे एक दूसरे पर आरोप
चित्रकूट में वन निगम और जीआरपी-आरपीएफ मढ़ रहे एक दूसरे पर आरोप।
चित्रकूट में वन निगम और जीआरपी-आरपीएफ मढ़ रहे एक दूसरे पर आरोप। तो तोड़ान बंद और जारी है तेंदू पत्ता की कालाबाजारी।
चित्रकूट, अमृत विचार। तेंदू पत्ता तोड़ान तो खत्म हो चुका है पर मानिकपुर से अवैध रूप से ट्रेनों में और ट्रैक्टरों से तेंदू पत्ता लादकर अन्यंत्र भेजे जाने की शिकायतें आम हैं। कार्रवाई के संबंध में वन विभाग और जीआरपी-आरपीएफ के अधिकारियों के एक दूसरे पर दोषारोपण से मामला पेचीदा हो रहा है।
वन निगम से मिली जानकारी के मुताबिक, तेंदू पत्ता तोड़ान सात जून से खत्म हो चुका है। अब पत्ता गोदामों में जा रहा है, बीस जून तक ढोलान खत्म हो जाएगा। इस बार ज्यादा संग्रहण नहीं हो पाया। इस बार लगभग 18 हजार मानक बोरा ही तोड़ान हुआ है। जबकि पैंतीस हजार का लक्ष्य था। मानिकपुर और अतर्रा गल्ला मंडी में तेंदू पत्ता रखने के लिए गोदाम बनाया गया है। बरगढ़ की ओर की यूनिट के लिए मानिकपुर और अनपरा, रसिन और मारकुंडी, कर्वी आदि के लिए अतर्रा में गोदाम बनाए गए हैं।
बताया जाता है कि मानिकपुर की गोदाम भर जाने की वजह से अब बोरे अतर्रा भेजे जा रहे हैं। उधर, मानिकपुर से ट्रेनों और ट्रैक्टरों से तेंदू पत्ते की बोरियां चोरी से झांसी और सतना की ओर भेजे जा रहे हैं। खास तौर पर सतना जाने वाली शटल से इनकी कालाबाजारी की शिकायतें आम हैं। इस संबंध में वन निगम और जीआरपी-आरपीएफ के अधिकारी एक दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।
बिना मिलीभगत के कुछ संभव नहीं- त्रिपाठी
वन निगम चित्रकूट के एसएन त्रिपाठी ने बताया कि लोग घरों में छिपाकर तेंदू पत्ते रख लेते हैं और बाद में इनको बेच लेते हैं। उनकी जानकारी में यह बात आई है और कई बार कार्रवाई भी हुई है। उन्होंने बताया कि कई बार इन बोरियों को पकड़ा भी गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्टेशन वाले इनमें मिले होते हैं। जीआरपी और आरपीएफ के लोग कहते हैं कि आप स्टेशन पर इस तरह की धरपकड़ नहीं कर सकते। इस पर वह उनको वाहन सीज करने की धमकी भी दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की तस्करी में विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बताया कि इसके लिए उन्होंने उच्चाधिकारियों को पत्र भी लिखा है।
मदद कभी मांगी ही नहीं- एसके राठी
आरपीएफ प्रभारी मानिकपुर एसके राठी का कहना था कि अगर आपको हमारा नंबर मिल सकता है तो वन निगम के अधिकारियों को भी तो मिल सकता है। अगर कोई कार्रवाई करनी है तो हमसे बताएं, हम पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि वन निगम ने आज तक कोई मदद नहीं मांगी। आरोप तो कोई भी लगा सकता है।
हमारी जानकारी में नहीं- दिलीप कुमार
जीआरपी प्रभारी मानिकपुर दिलीप कुमार मिश्रा ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा कि ट्रेनों से तेंदू पत्ता ले जाने की जानकारी उनकी जानकारी में नहीं है। उन्होंने कहा कि आज तक वन निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने यह जानकारी नहीं दी कि हमने धरपकड़ की और सहयोग नहीं मिला।
