हल्द्वानी: योग मनुष्य की समता और ममता को करता है मजबूत
कई पेचीदा रोगों का रामबाण इलाज है योग
हल्द्वानी, अमृत विचार। भारत और भारतीय संस्कृति में योग का प्रभाव और महत्व किसी से छिपा नहीं है। यूं तो सदियों से अपने देश में आम और खास सभी लोग योग करते चले आ रहे हैं, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योगा के रूप में विकसित और पल्लवित होने के बाद आज योग जिंदगी जीने की एक नई कला के रूप में देखा और समझा जा रहा है।
तमाम लोगों ने आज योग को अपने जीवन में शामिल कर लिया है और वे पहले से ज्यादा सेहतमंद होने के साथ निरोगी काया के स्वामी बन चुके है। इनमें से कई तो ऐसे हैं जिन्होंने असाध्य रोगों तक को मात दी है। इन लोगों के अनुसार अगर योग की परिभाषा सुनें तो कर हर कोई अपने शब्दों में इसे बयान करता है।
कोई योग को शारारिक व्यायाम ही नहीं बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से पूर्णतया मिलन बताता है तो किसी का कहना है कि योग मनुष्य में नए-नए सकारात्मक विचारों की उत्पत्ति करता है जो कि मनुष्य को गलत प्रवृति में जाने से रोकते हैं। आधुनिक पीढ़ी का कहना है कि योग मन और दिमाग की अशुद्धता को बाहर निकालकर फेंक देता है। योग व्यक्तिगत चेतना को मजबूती प्रदान करता है। योग मानसिक नियंत्रण का भी माध्यम है।
भगवत गीता में योग के बारे में बताया गया है कि - सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते। अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो योग मनुष्य को सुख-दुःख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि परिस्थितियों में सामान आचरण की शक्ति प्रदान करता है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में एक जगह पर कहा है कि ‘योगः कर्मसु कौशलम’ अर्थात योग से कर्मो में कुशलता आती हैं। वास्तव में जो मनुष्य योग करता है उसका शरीर, मन और दिमाग तरोताजा रहता है और मनुष्य प्रत्येक काम मन लगाकर करता है।
- उषा परगाईं , योग इंस्ट्रक्टर, निवासी ब्रज विहार, हल्द्वानी
भगवद गीता का पूरा छठा अध्याय योग को समर्पित है। योग के तीन प्रमुख प्रकार हैं। कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग। कर्म योग- कार्य करने का योग है। इसमें व्यक्ति अपने स्थिति के उचित और कर्तव्यों के अनुसार कर्मों का श्रद्धापूर्वक निर्वाह करता है। भक्ति योग- भक्ति का योग। भगवान् के प्रति भक्ति । इसे भावनात्मक आचरण वाले लोगों को सुझाया जाता है। और ज्ञान योग- ज्ञान का योग अर्थात ज्ञान अर्जित करने का योग। भगवत गीता के छठे अध्याय में बताए गए सभी योग जीवन का आधार है। इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
- जया जोशी, योग इंस्ट्रक्टर, निवासी कालाढूंगी रोड, हल्द्वानी
मेरी उम्र 26 साल है पिछले डेढ़ साल से योग कर रहा हूं, दो साल से भी ज्यादा स्लिप डिस्क की समस्या से परेशान रहा, तमाम चिकित्सकों के चक्कर काटकर जब थक गया तो आखिर में योग का सहारा लिया और आज एकदम सही हूं। जब से योग कर रहा हूं एकदम फिट हूं अब पेन किलर का भी सहारा नहीं लेना पड़ता और अब मेरा स्टेमिना भी पहले से काफी बड़ा है।
- मयंक निवासी लाल डांठ, हल्द्वानी
मेरी उम्र 24 साल है पिछले एक साल से योग कर रही हूं, सिटिंग जॉब की वजह से गले और पीठ में समस्या आ गई थी, असहनीय दर्द से जूझ रही थी चिकित्सकों ने कई सारी दवाएं लिख दीं मगर एक दोस्त के कहने पर जब योग को अपने रूटीन में शामिल किया तो एक माह में ही फर्क नजर आने लगा और आज मैं कोई दवा नहीं लेती, हमारे जैसे वर्किंग प्रोफाइल वालों के लिए योग बहुत जरूरी है जो घंटों कुर्सी से चिपके रहते हैं।
- रितिका, निवासी छोटी मुखानी
2008 से योग कर रही हूं, सीजेरियन और हर्निया के ऑपरेशन के बाद काफी परेशान थी मगर अब लगता ही नहीं कि मैं कभी इससे पीड़ित भी थी, न्यू जनरेशन को चाहिए की वो अपनी लाइफ स्टाइल में योग को हर हाल में शामिल करे जिससे वह अपने शरीर को सेहतमंद और तरोताजा रख सकेंगे।
- दीपा अग्रवाल, निवासी ब्रज विहार
मेरा थॉयराइड और पीसीओडी लेवल काफी बड़ा हुआ था चार माह से योग क्लास जा रही हूं और परिणाम चौकाने वाले हैं अब तो लगता है हम व्यर्थ ही परेशान होते हैं योग वास्तव में चमत्कारी विधा है मैं तो हर महिला को अस्पताल के खर्चे से बचने की सलाहू दूंगी और यही कहूंगी कि वे योग को अपनाएं और परिणाम एक माह में ही आपके सामने होंगे।
- सोनी जोशी, निवासी संजय कॉलोनी
