हल्द्वानी: गौला पुल पर फिर मंडराने लगे संकट के बादल
खनन की मार झेलते-झेलते पिलरों की नींव हुई कमजोर
देखरेख की कमी के चलते झड़कर गिरने लगा है पिलरों का प्लास्टर
हल्द्वानी, अमृत विचार। हल्द्वानी से गौलापार को जोड़ने वाले मुख्य पुल पर फिर से खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। कुछ ही वर्षों में पुल का अधिकांश हिस्सा जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। पुल के पिलरों की स्थिति खराब हो चुकी है, इन पिलरों से प्लास्टर झड़ रहा है।
पुल के पिलरों के असपास रेता खनन होने से पुल की नींव दिन प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। बीते बरसात में पुल 2 बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। करोड़ों की लागत से बना यह पुल एक बार फिर क्षतिग्रस्त होने के कगार पर पहुंच चुका है।
हल्द्वानी के मुख्य बाजार से एक किमी से भी कम दूरी पर बना गौला पुल हल्द्वानी को गौलापार, चोरगलिया, सितारगंज व खटीमा से जोड़ता है। पुल की लंबाई करीब 364.76 मीटर है। लेकिन वर्तमान समय में पुल जर्जर अवस्था में पहुंच रहा है।
वर्ष 2003 में वुड हिल कंपनी की ओर से गौला नदी पर पुल का निर्माण कराया गया था। लेकिन पुल ज्यादा सालों तक वाहनों को बोझ नहीं झेल पाया और वर्ष 2008 में पुल क्षतिग्रस्त हो गया। लोगों के मुताबिक पुल का अधिकांश हिस्सा नदी के तेज बहाव में समा गया था। बाद में करोड़ों की लागत से इसे दोबारा बनाया गया। वर्ष 2018 में पुल में दरार पड़ गई। साथ ही पुल की सुरक्षा दीवारों में लगे सरिया भी दिखने लगे।
अमृत विचार की टीम बुधवार को गौला नदी पर बने पुल की पड़ताल करने पहुंची तो पुल की अवस्था जर्जर हालत में दिखी। वर्ष 2021 में मानसून के वक्त गौला नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते तेज बहाव में पुल का करीब 30 मीटर हिस्सा टूटकर बह गया था। क्षतिग्रस्त हिस्से को मरम्मत करने पर भी मानकों की खुलकर धज्जियां उड़ाई गईं। वर्तमान समय में क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत तो की गई लेकिन क्षतिग्रस्त हिस्से में बने गैप को छोड़ दिया गया है।
आगामी मानसून सत्र में छोड़े गए गैप के चलते किसी भी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। समय पर पुल का मेंटिनेंस कार्य न होने से पुल जर्जर हालत में पहुंच रहा है। आसन्न बरसात में गौला में बाढ़ आने पर पुल को नुकसान होने की आशंका लोगों को सता रही है।
गौलापुल के 8 पिलर हुए जर्जर
गौला नदी पर बने पुल के 8 पिलर जर्जर हो चुके हैं। पिलरों का प्लास्तर झड़ कर नीचे गिर रहा है। वहीं गौला नदी में होते खनन के चलते दिन प्रतिदिन पिलरों की नींव भी कमजोर पड़ रही है। आने वाले बारिश के दिनों में गौला नदी के तेज बहाव में ये पिलर कितनी मजबूती से टिक पाएंगे ये तो वक्त ही बताएगा।
तीन बार क्षतिग्रस्त हो चुका है गौला पुल
हल्द्वानी की लाइफ लाइन कहे जाने वाला गौला पुल पर 3 बार क्षतिग्रस्त हो चुका है। नदी में बाढ़ आने से अक्टूबर 2021 में पुल का एक हिस्सा गौला नदी के बहाव के चपेट में आ गया था। जिसके चलते करीब 1 माह तक पुल पर आवागमन बाधित रहा। जुलाई 2008 में पूरा पुल क्षतिग्रस्त हो गया था जबकि 2018 में पुल में दरार आ गई थी। पुल की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रोजाना 5 हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं पुल से
गौला पुल से नियमित तौर पर 5 हजार से अधिक वाहनों का निकलना होता है। गौलापुल से पर्वतीय इलाकों के साथ ही साथ खटीमा, चोरगलिया, सितारगंज समेत यूपी के कई शहरों के लोग आवागमन के लिए इसी पुल का उपयोग करते हैं।
इन कारणों के चलते पुल हो सकता कमजोर
गौलापुल के कमजोर होने का मुख्य कारण खनन में मानकों का ख्याल नहीं रखना पुल के पिलर से करीब 100 मीटर की दूरी पर ही खनन करने की इजाजत है, लेकिन इसके बाद भी इन मानकों को ध्यान नहीं रखा जा रहा है। पुल के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान न रखना भी एवं पुल के नियमानुसार रखरखाव न होना भी कमजोर होने का कारण बन सकता है।
लोग बोले
गौलापार से हल्द्वानी को जोड़ने में मुख्य भूमिका के रूप में ये पुल खड़ा हुआ है, लेकिन समय-समय पर पुल का मेंटेनेंस न होने के चलते पुल जर्जर हालत में पहुंच रहा है। बारिश के वक्त पुल से निकलने पर भी डर सताता है।
-प्रेम जोशी, गौलापार निवासी
हल्द्वानी शहर के लिए गौला नदीं पर बना पुल अति महत्वपूर्ण है, पुल के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में लाखों की आबादी हल्द्वानी व गौलापार से संपर्क टूट सकता है। बीते 2 वर्ष पूर्व जब पूल का एक हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था तो करीब 1 महीने तक लोगों के सामने परेशानी बनी हुई थी।
-रईस अहमद, पार्षद
