बरेली: निजी अस्पताल में बच्चे की मौत, हंगामा, परिजनों ने इलाज में लगाया लापरवाही का आरोप
पुलिस को अभी तक नहीं मिली तहरीर, शव पोस्टमार्टम को भेजा
बरेली/फरीदपुर, अमृत विचार। फरीदपुर क्षेत्र स्थित मैक्स हॉस्पिटल में इलाज के दौरान तीन वर्ष के बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मामला शांत कराया। वहीं, मामले में डॉक्टर के चहेते कई सफेदपोश बच्चे के परिजनों पर दबाव बनाकर समझौता कराने में लगे हुए हैं।
थाना क्षेत्र के ग्राम चठिया फैजू निवासी लोकेंद्र सिंह चौहान के दो बेटे हैं। इनमें छोटा बेटा प्रशांत (3) की तबीयत खराब चल रही थी। जिसे परिजनों ने फरीदपुर के बीसलपुर रोड मैक्स हॉस्पिटल में डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने बच्चे को भर्ती करने को कहा। परिजनों का आरोप है कि इलाज शुरू होने पर कुछ देर बाद बच्चे की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन डॉक्टर ने बच्चे को हायर सेंटर या दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह नहीं दी। बल्कि खुद ही इलाज कर ठीक करने की झूठी तसल्ली देते रहे। देर शाम बच्चे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गुस्साए परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। वहीं, भीड़ और पुलिस को देखकर डॉक्टर मौके से फरार हो गया। थाना प्रभारी दयाशंकर सिंह का कहना है कि मामले में अभी तहरीर नहीं मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी विवादों में रह चुका है डॉक्टर
मैक्स हॉस्पिटल के जिस डॉक्टर पर बच्चे के इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। उसी डॉक्टर पर पूर्व में भी एक गर्भवती के प्रसव के दौरान अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा प्रसव कराने पर नवजात की मौत हो जाने का आरोप लगा चुका है। हालांकि, इस मामले में सफेदपोश के दबाव में परिजनों ने समझौता कर लिया था। आरोप है कि अब उसने अस्पताल का नाम बदलकर जगह भी बदल ली है।
तीन वर्षीय बच्चे की मौत की जानकारी मिली है। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन एवं डॉक्टर की डिग्री की जांच की जाएगी, जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी- डॉ. अनुराग गौतम, सीएचसी अधीक्षक, फरीदपुर।
बच्चे की क्रिटिकल स्थिति थी। ड्रिप लग रही थी। ब्लड की भी कमी थी, उसके बाद मैं बरेली चला गया था। दूसरे डॉक्टर समीर देख रहे थे- डॉ. साजिद, मैक्स हॉस्पिटल।
ये भी पढ़ें- बरेली: उठा सवाल, बड़ी कार्रवाई से परसाखेड़ा चौकी इंचार्ज को क्यों रखा गया अलग?
