रुद्रपुर: सितारगंज में किसान का कर डाला फर्जी ट्रैक्टर लोन, पीड़ित ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर उठाई सीबीआई जांच की मांग
रुद्रपुर, अमृत विचार। सितारगंज के अनुसूचित जाति के किसान को भारत सरकार की किसान ट्रैक्टर योजना का प्रलोभन देकर फर्जी ट्रैक्टर लोन करने का मामला सामने आया है, जबकि किसान का आरोप था कि आरोपियों ने योजना का लाभ बताकर पहले प्रलोभन दिया और बाद में सारे दस्तावेज व खाता खुलवाकर ट्रैक्टर भी नहीं दिया। यहां तक कि फर्जी लोन करवाकर वसूली का नोटिस भी भेज दिया।
अनुसूचित जनजाति आयोग देहरादून को मिले शिकायती पत्र के बाद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है। वहीं पीड़ित किसान ने राष्ट्रपति को संबोधित पत्र भेजकर प्रकरण की सीबीआई जांच करवाने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार महेश सिंह राणा निवासी ग्राम साधुनगर सितारगंज ने बताया कि वह अनुसूचित जनजाति थारू वर्ग का एक छोटा सा किसान है और थोड़ी बहुत खेती कर परिवार का गुजर बसर करता है।
आरोप था मई 2013 को उसके घर रफीक सैफी निवासी वार्ड-छह गदरपुर, सनव्वर अली वार्ड सात गदरपुर, मुजीद बेग, अमन निवासी रोशनपुर गदरपुर परिचित ओमप्रकाश सिंह निवासी डोहरी सितारगंज के साथ आए और भारत सरकार की थारू जाति के छोटे किसानों को 6 से 7 लाख रुपये में आयशर कंपनी का ट्रेक्टर 75 फीसदी अनुदान पर मैग्मा फिनकॉर्प कंपनी कोलकाता से मुहैया करा रही है। जिसके लिए दो लाख रुपये की खसरा खतौनी सहित फोटोयुक्त दस्तावेज लगाकर ट्रैक्टर मिल सकता है। इसके लिए रुद्रपुर स्थित महक मशीनरी स्टोर ट्रैक्टर सप्लाई और मैग्मा फिनकॉर्प कंपनी के स्थानीय कार्यालय हल्द्वानी को अधिकृत किया है।
पीड़ित किसान का आरोप था कि आरोपियों की बातों में आकर वह सारे दस्तावेज लेकर हल्द्वानी कार्यालय गया। कुछ दिन बाद आरोपियों द्वारा सितारगंज स्थित देना बैंक में एक खाता खुलवाया और चेक बुक अपने पास रख ली। जब काफी दिनों तक ट्रैक्टर नहीं मिला तो उसे फर्जीवाड़े का आभास हुआ। आरोप था कि अधिकृत ट्रेक्टर कंपनी की मैग्ना फाइनेंस कंपनी ने साजिश कर फर्जी तरीके से ट्रैक्टर लोन कर दिया और मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोलकाता में एक वाद दायर कर फर्जी ट्रैक्टर लोन वसूली का नोटिस भेज दिया।
इसके बाद लगातार वह न्याय के लिए पत्राचार कर रहा है। मगर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। बाद में जब पीड़ित ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने और उत्तराखंड अनुसूचित जनजाति आयोग देहरादून को शिकायती पत्र लिखा तो आयोग के आदेश के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर प्रकरण की पड़ताल शुरू कर दी है।
जिला प्रशासन ने भेजा किसान को नोटिस
- भारत सरकार की योजना के नाम पर फंसाए गए थारू वर्ग किसान महेश को पहले मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोलकाता में गुपचुप तरीके से वाद दायर किया। बाद में कुछ सालों बाद वसूली का नोटिस भेजा। बाद में जिला प्रशासन ने भी किसान को रिकवरी करने का नोटिस भेजा। किसान का कहना था कि उसे फर्जी ट्रैक्टर लोन स्वीकृत होने की कोई भनक नहीं लगी थी। यहां तक कि वाद दायर होने का भी कोई नोटिस नहीं आया।
156 के तहत किसान ने कराया था केस
रुद्रपुर। लोन वसूली का नोटिस आने के बाद न्याय की तलाश में थारू किसान भटकता रहा। जब पुलिस और प्रशासन ने किसान की कोई सुनवाई नहीं की तो किसान ने सीआरपीसी के तहत न्यायालय में याचिका डालकर एक वाद दायर किया था। बावजूद इसके पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि आरोपियों ने महेश राणा जैसे तमाम किसानों को अपने जाल में फंसाया जा चुका था। यदि पुलिस इसकी तफ्तीश करती तो एक बड़े गैंग का पर्दाफाश हो सकता था।
पीड़ित ने भेजी न्यायालय सहित आयोग को प्रतिलिपि
रुद्रपुर। कोलकाता में वाद दायर सहित प्रशासन का नोटिस आने के बाद पीड़ित किसान ने कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली, राज्यपाल उत्तराखंड, मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय नैनीताल, अध्यक्ष, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंह नगर, उपजिलाधिकारी सितारगंज, पुलिस क्षेत्राधिकारी सितारगंज, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली सितारगंज को प्रतिलिपि भेजकर कार्रवाई की मांग की है।
