खटीमा: उत्तराखंड में बाघ की अब तक की सबसे बड़ी खाल बरामद

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Edited By Amrit Vichar
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एसटीएफ का दावा, अधिकारियों ने कहा-राष्ट्रीय पशु की खाल की तस्करी में अभी और होंगी गिरफ्तारियां

बड़ा सवाल, बाघ को कहां, कब और कैसे शिकार बनाया गया, तस्करी के गिरोह के तार ढूंढने में जुटी टीमें

खटीमा, अमृत विचार। उत्तराखंड एसटीएफ की ओर अब तक पकड़ी गई बाघ की खालों में यह सबसे लंबी 11 फीट की खाल है। एसटीएफ हैरान है कि जंगल में बाघ का शिकार कहां, कब और कैसे किया गया। हालांकि एसटीएफ का दावा है कि जल्द ही सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे और इस मामले में अभी कई गिरफ्तारियां होंगी।

नेपाल बॉर्डर से सटे खटीमा के जंगलों में भी बाघ, तेंदुए, हाथी की खासी संख्या है। यह वन्यजीव बॉर्डर पार कर नेपाल से आवाजाही करते हैं। ऐसे में अंतर्राष्ट्रीय वन्य जीव तस्करों की सक्रियता का खतरा भी बना रहता है। भारत के साथ नेपाल, दोनों देशों की वन, एसएसबी व पुलिस की टीमें हमेशा अलर्ट रहती हैं।

फिलहाल एसटीएफ यह पता लगाने में जुट गई है कि बाघ को तराई, भाबर या पहाड़ कहां पर शिकार बनाया गया। वन्यजीव तस्करी के इस खेल में कौन-कौन शामिल हैं। तस्करी के गिरोह के तार राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कहां-कहां जुड़े हुए हैं। इन सभी प्रश्नों के जवाब के लिए जांच शुरू कर दी है। भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है। इसे वन्यजीव जन्तु संरक्षण अधिनियम की पहली अनुसूची में रखा गया है। इसका शिकार करना कानूनन गंभीर अपराध है। 


वन विभाग ने शुरू की जांच 

बाघ की खाल पकड़ने के बाद वन अफसरों की नींद भी टूट गई है। डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि चारों तस्करों के खिलाफ एस-टू दर्ज हो गया है। एसटीएफ के अलावा वन विभाग भी अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय कर रहा है। बाघ के शिकार से लेकर तस्करी के सभी तार को ढूंढने में टीमें लगाई गई हैं। 

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