Kanpur: ग्लूकोमा के गंभीर मरीजों की आंखों में लगेगी डिवाइस, GSVM के नेत्र रोग विभाग में शुरू होने जा रही सर्जरी
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में शुरू होने जा रही सर्जरी।
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में सर्जरी शुरू होने जा रही। अब ग्लूकोमा के गंभीर मरीजों की आंखों में डिवाइस लगेगी। गंभीर मामलों में दिल्ली एम्स और एसजीपीजीआई के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
कानपुर, [विकास कुमार]। यह खबर ग्लूकोमा के गंभीर और अति गंभीर समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए राहत भरी है। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली एम्स और लखनऊ के एसजीपीजीआई के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में ग्लूकोमा की जटिल सर्जरी शुरू होने जा रहा है। इस सर्जरी में मरीजों की आंखों में खास तरह की डिवाइस लगाई जाती है, जिससे आंखों पर प्रेशर कम होने लगता है।
नेत्र रोग विभाग की एचओडी प्रो. शालिनी मोहन के मुताबिक कुछ मरीजों को ग्लूकोमा की गंभीर स्थिति यानी यूविआइटिक ग्लूकोमा, पोस्ट ट्राइमेटिक ग्लूकोमा व स्टेरॉयड ग्लूकोमा हो जाता है, जिसमें साधारण सर्जरी व लेजर विधि कारगर नहीं है। ऐसे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता हैं।
उन्हें दिक्कत न हो सके, इसलिए प्रो. शालिनी मोहन ने मरीजों की आंखों में ग्लूकोमा वाल्व लगाने की तकनीक पर शोध किया। उन्होंने 25 माह में 49 मरीजों की आंखों के बाहरी हिस्से (स्कलेरा ) में यह डिवाइस लगाई, जिसके परिणाम बेहतर सामने आए। इस डिवाइस से मरीज की आंखों का प्रेशर कंट्रोल होगा।
यूएसए की है यह डिवाइस
प्रो. शालिनी मोहन ने बताया कि उन्होंने 2006 में ग्लूकोमा वाल्व डिवाइस लगाने की तकनीक अमेरिका के शिकागो नेत्र अस्पताल में सिखी थी। उसके बाद हैलट अस्पताल में आने वाले गंभीर ग्लूकोमा के मरीजों में 25 माह में 49 मरीजों में यह डिवाइस लगाई गई, जिसके बाद उनको देखने में कोई समस्या नहीं आ रही है। यह डिवाइस यूएसए की है, जिसका प्रारूप भारत में भी बन रहा हैं।
इसे काला मोतिया कहते हैं
इसे काला मोतिया भी कहा जाता है। इसमें आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है। सही समय पर इलाज शुरू नहीं किया गया तो दोबारा रोशनी नहीं आती है। बीमारी में आंख पर दबाव बढ़ने से ऑप्टिक नर्व क्षतिग्रस्त हो जाती है। ऑप्टिक नर्व आंख को दिमाग से जोड़ती है, जिससे हम देख पाते हैं।
इस वजह से होता है ग्लूकोमा
सूर्य की रोशनी और हल्की धूप से किनारा करना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। विटामिन डी की कमी से ग्लूकोमा की समस्या पैदा हो सकती है। ग्लूकोमा के मुख्य कारण आंख में चोट लगना, अनुवांशिक, मधुमेह व उच्च रक्तचाप होते हैं। यह बुजुर्गों के साथ ही युवाओं में भी होता हैं।
