उप्र: बिजली गुल प्रकरण में पॉवर कार्पोरेशन का ईईएसएल को नोटिस

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लखनऊ, अमृत विचार। स्मार्ट मीटर बत्ती गुल प्रकरण में 20 दिन बाद एनर्जी एफिसिएंशी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को पावर कारपोरशन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। कार्पोरेशन ने बिजली कम्पनियों के किए गये कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट की धारा 6.1 के तहत नोटिस दिया। नोटिस में ईईएसएल के ऊपर गंभीर आरोप लगाया गया है। पूर्व पत्राचार का …

लखनऊ, अमृत विचार। स्मार्ट मीटर बत्ती गुल प्रकरण में 20 दिन बाद एनर्जी एफिसिएंशी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को पावर कारपोरशन ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। कार्पोरेशन ने बिजली कम्पनियों के किए गये कॉन्ट्रैक्ट एग्रीमेंट की धारा 6.1 के तहत नोटिस दिया। नोटिस में ईईएसएल के ऊपर गंभीर आरोप लगाया गया है।

पूर्व पत्राचार का हवाला देते हुए कार्पोरेशन ने मास्टर डाटा मैनेजमेंट (एमडीएम) पर स्लो वर्क का आरोप लगाया है। इसके साथ कार्पोरेशन की ओर से कहा गया है कि स्मार्ट मीटर में जो वोडा मोबाइल कंपनी का सिम लगा है, वह बहुत से इलाकों में सही से काम नहीं कर रहा, जो असंतोषजनक है और कार्यवाही को दर्शाता है। आज भी हजारों उपभोक्ताओं के बिल पेंडिंग हैं।

ईईएसएल द्वारा समस्याओं का निस्तारण बहुत ही निराशा जनक है। मीटर रीडिंग का टारगेट 98 प्रतिशत है। लेकिन अभी केवल 95 प्रतिशत रीडिंग हो रही। मीटर बंद होने के बाद कमांड देने पर भी लम्बे समय तक बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर उपभोक्ता जिनकी बिजली बाधित हुई थी, चालू नहीं हुई।

नोटिस में नियामक आयोग आर्डर को भी दर्शाया गया है, बड़े पैमाने पर ईईएसएल की तकनीकी कमियां उजागर की गयी हैं। इस दौरान यूजर एक्सेप्टेंस टेस्टिंग को भी सफलता पूर्वक न कराना नियमों का उल्लंघन माना गया है।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा एनर्जी एफिसिएंशी सर्विसेज लि. (ईईएसएल) को पावर कार्पोरेशन द्वारा भेजे गये कारण बताओ नोटिस में स्मार्ट मीटर लगा रही मीटर निर्माता कम्पनियों जीनस आईटीआई जेन के बारे में कुछ न कहना एक बड़ा सवाल उठा रहा है। जबकि स्मार्ट मीटर भार जंपिंग का मामला और सीपीआरआई में जांच कराई गयी।

मीटर के खिलाफ दबाई गयी रिपोर्ट अपने आप में बड़ा सवाल है। कारण है कि ईईएसएल द्वारा ही मीटर खरीद कर लगवाए जा रहे हैं। ऐसे में जब वोडाफोन के बहुत से इलाकों में न काम करने को नोटिस में आधार बनाया गया तो मीटर निर्माता कम्पनियों को बचाने की साजिश कौन कर रहा है, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

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