झटका : 10 हजार करोड़ का निवेश और 14 हजार रोजगार
बिखरने लगा सपना... एक ही झटके में 10 हजार
अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। जिले में करीब 42 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश और 48 हजार लोगों को रोजगार देने का सपना परवान चढ़ने से पहले ही दरक गया है। निवेश के प्रस्ताव देने वाले 158 उद्यमियों के पीछे हट जाने की वजह से एक ही झटके में दस हजार करोड़ से ज्यादा का निवेश और रोजगार के 14 हजार अवसर कम हो गए हैं। अब इन प्रस्तावों को पोर्टल से हटाने की तैयारी चल रही है।
फरवरी में लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में बरेली में 534 औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए 40219 करोड़ के एमओयू साइन कराए गए थे। दावा किया गया था कि ये इकाइयां स्थापित होने के बाद जिले में 42051 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। बाद में कुछ इकाइयां और बढ़ीं। पोर्टल पर 578 इकाइयां अपलोड होने के बाद निवेश की धनराशि बढ़कर 42 हजार करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है और इससे 48 हजार लोगों को रोजगार मिलने का दावा किया जा रहा है। अब जबकि सितंबर में लखनऊ में जीबीसी यानी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी की तैयारी शुरू हो गई है, बरेली में एक ही झटके में 158 इकाइयां कम हो गई हैं।
पोर्टल पर अपलोड इन इकाइयों का प्रस्ताव देने वाले उद्यमियों से संपर्क ही नहीं हो पा रहा है। कुछेक से संपर्क हुआ भी तो उन्होंने इकाई शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। विभाग ने अब इन इकाइयों को डुप्लीकेट की श्रेणी में रख दिया है और उन्हें पोर्टल से हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इन इकाइयों के पोर्टल से हटते ही निवेश और रोजगार के दावों का धड़ाम होना भी तय है। इससे करीब 10 हजार करोड़ के निवेश और 14 हजार रोजगार का रास्ता बंद हो जाएगा।
शासन मांग रहा है बार-बार अपडेट, फंस गए अफसर
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी से पहले शासन लगातार अपडेट ले रहा है। इसी कारण डेढ़ सौ से ज्यादा इकाइयां कम हो जाने से अफसरों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। शुरुआती दौर में बड़े पैमाने पर बरेली निवेश दिखाकर अपने नंबर बढ़ाने की कोशिश करने वाले अफसरों को अब कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। पोर्टल पर दिख रही इकाइयों और जीबीसी के लिए तैयार इकाइयों की संख्या में काफी अंतर हैं। शासन से पूछा जा रहा है कि बाकी उद्यमी इकाइयां लगाने के लिए इच्छुक क्यों नहीं है। अफसरों को इसका जवाब देते नहीं बन रहा है।
कमिश्नर ने मांगी जानकारी, एक भी विभाग ने नहीं दिया जवाब
यह मामला पिछले महीने में हुई बैठक में कमिश्नर साैम्या अग्रवाल के सामने भी उठा था। उन्होंने सभी विभागों से जानकारी मांगी थी कि किन विभागों में प्रस्ताव देने वाले उद्यमी इकाई लगाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। कमिश्नर के आदेश का हवाला देते हुए उद्यमी मित्र सुशील कुमार ने 25 विभागों को पत्र लिखकर यह जानकारी मांगी थी, लेकिन अब तक किसी ने जवाब नहीं दिया है। यह डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने 11 अगस्त को सभी विभागों की बैठक बुलाई है।
मंडल के दूसरे जिलों में भी ऐसे ही हालात
बताया जा रहा है कि प्रस्तावों और वास्तविकता में बरेली जैसा अंतर बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत समेत मंडल के बाकी सभी जिलों में भी है। प्रस्तावों के अनुरूप औद्योगिक इकाइयों के न लग पाने की अलग-अलग वजहे हैं। इनमें जमीन के संकट से लेकर भू उपयोग परिवर्तन और नक्शा पास कराने में आ रही अड़चनें प्रमुख हैं। इसी वजह से उद्यमी अपने प्रस्तावों से किनारा कर रहे हैं।
शासन के कोप से बचने के लिए अब नई इकाइयों की तलाश
अंदरखाने यह भी सुगबुगाहट है कि इकाइयों के निष्क्रिय होने की वजह से शासन सख्त रुख देखने के बाद विभागीय अफसर फजीहत से बचने का रास्ता ढूंढने में लगे हुए हैं। फिलहाल इसका तोड़ निकालने के लिए नई इकाइयों की तलाश शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि कुछ नए उद्यमी निवेश करने के इच्छुक हैं। निष्क्रिय इकाइयां कम होने के बाद उन्हें शामिल करके संख्या को पूरा किया जा सकता है।
तेजी से काम चल रहा है। अभी किसी से बात हो पा रही है किसी से नहीं। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं है कि वे लोग इकाई लगाने के इच्छुक नहीं है। इसी वजह से निष्क्रिय इकाइयों को वेटिंग में डाला गया है। पूरी स्थिति साफ हो जाने के बाद ही उन्हें पोर्टल से हटाया जाएगा - सर्वेश्वर शुक्ला, संयुक्त आयुक्त उद्योग।
34,000 लोगों के लिए ही रोजगार का रास्ता रह जाएगा
32 हजार करोड़ के करीब निवेश रह जाएगा जिले से
420 इकाइयां ही रह जाएंगी निष्क्रिय इकाइयों के हटने से
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