संभल: अनिमितताएं मिलने पर बसपा नेता की मीट फैक्ट्री सील

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Edited By Amrit Vichar
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निरीक्षण में मिलीं खामियों को लेकर जारी नोटिस का नहीं दिया जवाब और न ही 2.80 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की जमा

संभल, अमृत विचार। सदर कोतवाली क्षेत्र के चिमयावली में संचालित बसपा नेता शकील कुरैशी की साझेदारी वाली अलफलाह फ्रोजन मीट फैक्ट्री को प्रदूषण विभाग व प्रशासन की टीम ने सील कर दिया। यह कार्रवाई प्रदूषण व जल सहमति शर्तों के उल्लंघन व क्षतिपूर्ति अदा न करने के चलते प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अधिकारी के आदेश पर की गई है। 

गांव चिमयावली में संचालित अलफलाह फ्रोजन फूड मीट फैक्ट्री का शिकायतों के आधार पर 7 जून को निरीक्षण किया गया था तो खून मिला पानी जमीन पर बहता पाया गया था। पानी को शुद्ध करने के संयंत्र चालू हालत में नहीं थे। प्रदूषण फैलने से रोकने का फिल्टर क्रियाशील नहीं पाया गया। अन्य कई खामियां मिलने के साथ ही ईटीपी सॉलिड जनरेशन एवं निस्तारण के संबंध में लॉगबुक का प्रावधान नहीं मिला।

फैक्ट्री द्वारा जल सहमति की विशिष्ट शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया। जबकि इससे पहले 2.80 लाख रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई थी। यह धनराशि बोर्ड में जमा नहीं कराई गई और न ही 17 जुलाई को जारी कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया गया।

जिससे प्रतीत हुआ कि पर्यावरणीय सुरक्षा एवं जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से मीट फैक्ट्री से पर्यावरण की प्राकृतिक जल गुणवत्ता एवं आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को रोका जाए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण अधिकारी विवेक राय ने मीट फैक्ट्री की संचालन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से बंद करने और बिजली एवं जलापूर्ति कनेक्शन को तत्काल काटने को लेकर आदेश जारी किया।

इसके आधार पर शुक्रवार को नायब तहसीलदार, लेखपाल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। एसडीएम सुनील कुमार त्रिवेदी ने बताया कि मुख्य पर्यावरण अधिकारी के आदेश पर प्रशासन ने मीट फैक्ट्री को सील कर दिया है। अन्य कार्रवाई कराई जा रही है। 

खेतों में जा रहा था खून मिला पानी
संभल। मीट फैक्ट्री द्वारा प्रदूषण फैलाने की शिकायत कई बार गांव के लोगों ने की थी। जिन किसानों के आसपास खेत थे उन्होंने खेतों में खून मिला पानी आने से फसलें नष्ट हो जाने की शिकायत की थी। इसके बाद ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने फैक्ट्री में निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान खुलकर सामने आ गया था कि फैक्ट्री बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैलाकर प्रदूषण लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर रही थी।

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