लखनऊ : द्वारिकापुरी में मंथन करेगें देश भर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नेता
लखनऊ, अमृत विचार। देश भर के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के नेता 23 से 24 सितंबर के बीच गुजरात के द्वारिकापुरी में बैठक कर कर्मचारी हितों पर चर्चा करने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महासचिव सुरेश सिंह यादव ने रविवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि 23- 24 सितंबर को द्वारिकापुरी गुजरात में राष्ट्रीय स्तर की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में समस्त राज्यों के चतुर्थ श्रेणी सरकारी सेवकों के वेतनमान, भर्ती और पुरानी पेंशन पर मंथन किया जाएगा।
बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर आन्दोलन की घोषणा हो सकती है। यादव ने बताया कि बैठक मेें समस्त राज्यों के पदाधिकारियों की उपस्थिति में अखिल भारतीय चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर के और गणेशन, राष्ट्रीय महामंत्री सीताराम सोलंकी की अध्यक्षता बैठक संपन्न होगी। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कई मुख्य मांगों को लेकर समस्त राज्य के कर्मचारी ज्ञापनों के माध्यम से सरकार को केंद्र सरकार और राज्य सरकार को ज्ञापन दिए गए लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ, जिसको लेकर आम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती पर लगी रोक, पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग, आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने , आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को और आशा कार्यकर्ताओं को न्यूनतम वेतनमान 20000 निर्धारित कराये जाने आदि मांगों पर विचार किया जाएगा।
सिंह ने बताया कि आज उत्तर प्रदेश में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साढे चार लाख पद रिक्त है। उत्तर प्रदेश से इस बैठक में राष्ट्रीय डिप्टी जनरल सेक्रेटरी रामराज दुबे, राष्ट्रीय कार्यकारिणी अध्यक्ष उमेश बहादुर सिंह, राष्ट्रीय डिप्टी जनरल सेक्रेटरी रामचंद्र गुप्ता, राष्ट्रीय कार्यक्रम सदस्य रामगोपाल गौतम सहित 21 प्रतिनिधि शामिल होगे। उन्होंने बताया कि भारतवर्ष में 90 लाख चतुर्थ श्रेणी के पद स्वीकृत हैं 60 प्रतिशत से अधिक सेवानिवृत हो चुके हैं। आउटसोर्सिंग के नाम पर ठेकेदारी ठेकेदारों मालामाल हो रहे हैं। ठेका कार्मिकों एक ही काम के लिए अलग अलग विभागों में अलग अलग मानदेय कर उनका शोषण किया जा रहा है।
एक तरफ सरकार की ओर से अगर ठेका कार्मिकों को 15000 मानदेय दिया जा रहा है तो उसे मात्र सात से आठ हजार का ही भुगतान हो रहा है। उत्तर प्रदेश में ही सरकार की नाक के नीचे कम्पयूटर ऑपरेटर को कही 12 तो कही 15 तो कही 24 हजार मानदेय देकर चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों का शोषण किया जा रहा है।
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