रामनगर: तराई पश्चिमी एवं रामनगर वन प्रभाग में कल से होगी गिद्धों की गणना
रामनगर, अमृत विचार। वन प्रभाग ने कार्बेट फाउंडेशन के साथ गिद्धों के संरक्षण की कवायद शुरू कर दी है। दर्द निवारक डाइक्लोफेनेक का दंश झेल रहे विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण के लिए कॉर्बेट फाउंडेशन ने तराई पश्चिमी एवं रामनगर वन प्रभाग के सहयोग से पहल की है। संस्था पहले दोनों वन प्रभागों में गिद्धों की मौजूदगी का डाटा जुटाएगी। दोनों वन प्रभागों के वनकर्मी सोमवार को सभी संभावित स्थानों में गिद्धों की गणना करेंगे।
रविवार को ईको टूरिज्म सेंटर चूनाखान में दोनों वन प्रभागों के वनकर्मियों को गिद्ध संरक्षण के गुर सिखाए गए। कार्यक्रम के दौरान कार्बेट फाउंडेशन के उपनिदेशक डॉ. हरेंद्र बर्गली ने कहा कि लोगों द्वारा जाने-अनजाने में इस्तेमाल की गई दर्द निवारक डाइक्लोफेनेक दवा के कारण गिद्धों की 95 फीसदी आबादी काल कवलित हो गई है। 80 के दशक तक 4 करोड़ गिद्ध पिछले 20 सालों में 50 हजार तक सिमट गए हैं। पर्यावरण संरक्षण में गिद्ध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रोजेक्ट ऑफिसर दीप्ति पटवाल एवं नेहा रैक्वाल ने कहा कि हमें लोगों को जागरूक करना होगा कि वे मवेशियों के लिए डाइक्लोफेनेक की जगह मेलॉक्सिकैम का इस्तेमाल करें। एसडीओ प्रदीप कुमार धौलाखंडी ने कहा कि वनकर्मियों को जंगल में मृत पड़े या फेंके गए मवेशियों की नियमित रूप से निगरानी करनी होगी।
इस दौरान गिद्धों की पहचान एवं गणना के गुर भी सिखाए गए। कार्यशाला में प्रशिक्षु एसडीओ आयशा बिष्ट, रेंजर ललित जोशी, ख्याली राम, लक्ष्मण सिंह मर्तोलिया, जेपी डिमरी, ललित कुमार, कृपाल बिष्ट, मुकेश जोशी, आरसी ध्यानी समेत डिप्टी रेंजर, वन दरोगा व वन रक्षक मौजूद रहे।
