बरेली: अंधेर नगरी... अपनी दुकानों को जारी कर दिए लाखों के टैक्स बिल
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम का टैक्स विभाग शहर के आम करदाताओं के लिए कितनी बड़ी मुसीबत है, उसकी हरकतों से इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
इस विभाग में कितनी गंभीरता से काम हो रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब नगर निगम की दुकानों को ही टैक्स के बिल जारी कर दिए गए हैं, जबकि नगर निगम एक्ट में इसका प्रावधान ही नहीं है। इन बिलों में दुकानों के किराएदारों को लाखों का बकायादार बताया गया है। इससे उनमें खलबली मच गई है।
रामपुर बाग में हिंद टॉकीज केपीछे मकरंदपुर सिविल लाइंस में नगर निगम की लगभग 50 दुकानें हैं। इन दुकानों का शुरू में 65 रुपये मासिक किराया था जो अब बढ़कर लगभग 17 सौ रुपये हो गया है। दुकानदारों के मुताबिक वे लोग नियमित रूप से दुकानों का किराया अदा करते हैं। ज्यादातर दुकानदारों का सितंबर तक का किराया जमा है। शुक्रवार को उन्हें नगर निगम की ओर से जो टैक्स बिल जारी किए गए, उनमें न सिर्फ सीवर और वाटर टैक्स के साथ हाउस टैक्स शामिल है, बल्कि हाउस टैक्स की रकम भी लाखों में है। ये बिल मिलने के बाद सारे दुकानदार बुरी तरह चकरा गए हैं।
दुकानदारों का कहना है कि नगर निगम के कर्मचारी हर तीन महीने पर में दुकानों का किराया लेने आते हैं। कोई दुकानदार अपना किराया लंबित नहीं रखता। अब अचानक उन्हें टैक्स के बिल भी जारी कर दिए गए हैं और उन्हें लाखों का बकायादार बताया जा रहा है। इससे पहले न कभी टैक्स बिल जारी हुआ न कभी उन्हें बताया गया कि उन पर ये टैक्स लागू होंगे।
रामपुर बाग के पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि दुकानदारों को जारी किए गए बिल अभी उनके पास आए नहीं हैं। नगर निगम की दुकानों पर हाउस टैक्स लगाने का कोई प्रावधान नहीं है। यह अजीबोगरीब है कि इसके बाद भी टैक्स के बिल भेजे जा रहे हैं। यह भी गंभीर सवाल है कि कर अधीक्षक की ओर से जारी इन बिलों को किसी अफसर ने क्यों चेक नहीं किया।
वर्जन
अभी इस तरह की किसी ने शिकायत नहीं की है। फिलहाल मामला जानकारी में ही आया है। बाजार के इस प्रकरण को दिखवा लूंगा तभी कुछ कह पाऊंगा। - पीके मिश्रा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी
अब तक सीवर और वाटर टैक्स भी छोड़े बैठे थे
नगर निगम के नियमों के मुताबिक उसके किराएदारों पर हाउस टैक्स नहीं सिर्फ वाटर और सीवर टैक्स लागू होता है लेकिन नगर निगम में अंधेरगर्दी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हिंद टॉकीज के पीछे स्थित दुकानों से अब तक वाटर और सीवर टैक्स भी नहीं लिया जा रहा था। अब वाटर और सीवर टैक्स के साथ अचानक हाउस टैक्स के बिल भी जारी कर दिए गए।
सवाल यह भी है कि इन दुकानों का टैक्स निर्धारण कब और किस अधिकारी के आदेश पर किया गया। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें अब तक किसी ने नहीं बताया कि उन्हें हाउस, वाटर और सीवर टैक्स देना है। ऐसे में यह भी काफी दिलचस्प है कि मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पीके मिश्रा के मुताबिक यह मामला उनकी जानकारी में ही नहीं है।
एक-एक दुकान पर दिखाया ढाई-ढाई लाख का बकाया
दुकान नंबर 11-12 की आईडी 055013 पर नगर निगम की ओर से जारी बिल में हाउस टैक्स की ही मद में एक लाख पांच हजार 212 रुपये का बकाया दिखाया गया है। इसके अलावा वाटर टैक्स का 1.02 लाख और सीवर टैक्स का 27141 रुपये बकाया दिखाया गया है। बिल में तीनों मद में लगाए गए टैक्स पर क्रमश: 10948, 10701 और 2826 रुपये का ब्याज भी जोड़ा गया है।
इस तरह एक ही दुकान पर टैक्स का 2 लाख 35 हजार 108 रुपये का बकाया बताया गया है। इसके अलावा एक बिल एक लाख 13 हजार 983 रुपये और दूसरा एक लाख 680 रुपये का भेजा गया है। इन बिलों से दुकानदारों के होश उड़ गए हैं।
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