प्रयागराज: राधास्वामी सत्संग भवन मामले में हाईकोर्ट ने फैसला किया सुरक्षित
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को धार्मिक संस्था राधास्वामी सत्संग सभा द्वारा दावा की गई भूमि के एक टुकड़े के संबंध में विध्वंस अभियान को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित कर लिया और दोनों पक्षों (राधास्वामी सत्संग सभा और स्थानीय प्रशासन) को फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने का भी निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है। मालूम हो कि गत सप्ताह सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने 27 सितंबर के पिछले आदेश को आगामी 16 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था, जिसमें आगरा के दयालबाग स्थित धर्मार्थ संस्था राधास्वामी सत्संग सभा के दावे वाली भूमि पर स्थानीय प्राधिकारी द्वारा किए जा रहे विध्वंस अभियान पर रोक लगा दी गई थी।
इसके अलावा कोर्ट ने पूर्व में पारित अपने आदेश में आगरा प्राधिकरण को सत्संग सभा भूमि के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही का मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के लिए भी कहा था। याचिका में तर्क दिया गया है कि संबंधित प्राधिकारी के पास विवादित भूमि पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं था, फिर भी उसने विध्वंस आदेश पारित होने से पहले ही समिति द्वारा बनाए गए गेट और चहारदीवारी को ध्वस्त करना शुरू कर दिया।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि जिन दो संपत्तियों पर विध्वंस कार्य किया गया है, वे अलग-अलग कार्यवाही में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित अंतरिम आदेशों द्वारा संरक्षित हैं। याचिका में आगे कहा गया है कि पुलिस ने राधास्वामी सत्संग सभा के मैदान में इकट्ठा हुए सेवकों पर बिना किसी पूर्व चेतावनी या नोटिस के लाठी चार्ज किया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने सत्संगियों के जिस समूह को पीटा, उसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
राज्य सरकार की ओर से मौजूदा याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि विवादित जमीन पर अतिक्रमण करके निर्माण किया गया है। कोर्ट के समक्ष वर्तमान याचिका की पोषणीयता पर भी राज्य सरकार की ओर से विरोध करते हुए कहा गया कि याची के पास वैधानिक अपील का उपाय है। मालूम हो कि 24 सितंबर 2023 को जब राजस्व विभाग की टीम निर्माण ध्वस्त करने के लिए मौके पर पहुंची तो राधास्वामी सत्संग सभा के लोगों और पुलिस के बीच झड़प हो गई जिसमें कई लोग घायल हुए।
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