पीएम केयर्स फंड में पूरी पारदर्शिता: निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली। कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की राशि पीएम केयर्स फंड में देने और इसमें दिये गये योगदान को आयकर से छूट का प्रावधान करने वाले कराधान एवं अन्य विधि (कतिपय उपबंधों का स्थिलिकरण और संशोधन) विधेयक, 2020 आज लोकसभा में पारित हो गया। यह विधेयक कराधान एवं अन्य विधि (कतिपय उपबंधों में …
नई दिल्ली। कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की राशि पीएम केयर्स फंड में देने और इसमें दिये गये योगदान को आयकर से छूट का प्रावधान करने वाले कराधान एवं अन्य विधि (कतिपय उपबंधों का स्थिलिकरण और संशोधन) विधेयक, 2020 आज लोकसभा में पारित हो गया। यह विधेयक कराधान एवं अन्य विधि (कतिपय उपबंधों में छूट) अध्यादेश, 2020 के स्थान पर लाया गया है।
कोविड-19 के मद्देनजर कराधान और रिटर्न आदि से जुड़ी कई तारीखों को आगे बढ़ाने के लिए अध्यादेश द्वारा किये गये प्रावधनों को इस विधेयक में शामिल किया गया है। पीएम केयर्स फंड में दी जाने वाली राशि को आयकर से छूट और सीएसआर संबंधी छूट के साथ ही आयकर रिटर्न के फेसलेस आकलन की भी इस विधेयक के जरिये व्यवस्था की जा रही है।
विधेयक पर सदन में हुई चर्चा के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पीमए केयर्स फंड में पूरी पारदर्शिता है। उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स फंड और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष में प्रबंधन और पंजीकरण के अलावा कोई अंतर नहीं है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष में सिर्फ एक पार्टी के अध्यक्ष को स्थायी सदस्य बनाने का प्रावधान किया गया है जबकि पीएम केयर्स फंड में सभी सदस्य पदेन हैं। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष 1948 से आज तक पंजीकृत नहीं हुआ है जबकि पीएम केयर्स फंड पूरी तरह पारदर्शी है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि दोनों का दोनों कोषों का उद्देश्य एक है, वर्तमान समय में एक ही कंपनी दोनों का ऑडिट कर रही है, दोनों सूचना का अधिकार कानून के दायरे से बाहर हैं और दोनों का प्रशासनिक कार्य प्रधानमंत्री कार्यालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की देखरेख में है। इस विधेयक के जरिये प्रधानमंत्री राष्ट्रीय आपदा कोष की तरह की पीएम केयर्स फंड में दिये जाने वाले योगदान को आयकर की धारा 80सी के तहत आयकर से छूट दी जा रही है और कंपनियों को अपनी सीएसआर की राशि इस कोष में देने का अधिकार दिया जा रहा है।
कोविड-19 के मद्देनजर निर्मला सीतारमण ने कहा कि कराधान से संबंधित कई तारीखों में बदलाव की जरूरत थी। साथ ही समय पर कर नहीं भरने, रिटर्न नहीं भरने तथा अन्य नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाता है। उन जुर्मानों से भी छूट देनी क्योंकि जब सरकार उपबंधों के लिए समय बढ़ा रही है तो विलंब शुल्क और जुर्माना नहीं लगाया जा सकता। इन सबका प्रावधान इस विधेयक में है।
उन्होंने बताया कि इस विधेयक में सरकार को यह भी अधिकार दिये गये हैं कि भविष्य में इन तिथियों को वह और आगे बढ़ा सके। अभी हमें नहीं मालूम कि कोविड-19 की स्थिति कब तक रहेगी। ऐसे में दुबारा तिथि आगे बढ़ाने के लिए संसद में विधेयक लाने की जरूरत नहीं रहेगी। अध्यादेश के अलावा कुछ नयी बातें भी इस विधेयक में हैं।
इसमें विवाद से विश्वास योजना की अवधि 31 दिसंबर तक की जा रही है। अन्य सभी तिथियों को फिलहाल 30 सितंबर तक बढ़ाया गया है। सबका विश्वास योजना की अवधि भी दिसंबर तक बढ़ायी गई है। स्रोत पर कर वसूली में 25 प्रतिशत की कटौती की गई है। निवेश के बारे में भी कुछ प्रावधान किये गये हैं। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम में विधेयक के जरिये किये जाने वाले बदलावों से राज्यों को दी जाने वाली क्षतिपूर्ति पर कोई असर नहीं होगा।
