हल्द्वानी: भुप्पी हत्याकांड: CCTV की गवाही पर हत्यारों को मिला आजीवन कारावास
हल्द्वानी, अमृत विचार। हल्द्वानी में चार साल पहले सिंधी चौराहा क्षेत्र में भूपेंद्र पांडे की हत्या से पूरा शहर सहम गया था। शहर के दो भाई गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता ने सरेआम भूप्पी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। फिल्मी अंदाज में हुए इस हत्याकांड के तुरंत बाद ही दोनों भाईयों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले में मौके पर मौजूद पुलिस कर्मी की भी गवाही हुई है।
हत्याकांड में अभियोजन पक्ष की ओर से मामले की कोर्ट में जिरह कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील शर्मा ने बताया कि उन्होंने 14 गवाह प्रस्तुत किए थे। संदीप कुकसाल, दिनेश सागर के अलावा मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी की भी गवाही हुई थी। कहा कि ये राज्य का पहला मामला है जिसमें पूरा हत्याकांड पुलिस के लगाए सीसीटीवी में दर्ज हुआ था। सीसीटीवी की डीवीआर को कोर्ट में भी चलाया गया। साथ ही बैलेस्टिक रिपोर्ट के लिए विधि विज्ञान केंद्र देहरादून से भी रिपोर्ट आई। जिसमें पता चला कि दोनों ही रिवॉल्वर की चली गोलियां मृतक के पेट में से मिली है।
दोस्त को बचाने गए थे और खुद बन गए निशाना: कॉलटैक्स रोड शीशमहल निवासी भूपेंद्र चंद्र पांडेय उर्फ भुप्पी (50) की घर के पास हार्डवेयर की दुकान थी। वह प्रॉपर्टी डीलिंग का काम भी करते थे। गौरव व सौरभ गुप्ता के साथ रुपयों को लेकर विवाद था। भूप्पी के मित्र दिनेश सागर और भूप्पी दोनों को ही गुप्ता बंधुओं की उधारी चुकानी थी। गुप्ता बंधुओं ने पांच-पांच लाख रुपये के चेक भूप्पी और दिनेश को दिए थे। दोनों ही चेक बैंक में बाउंस हो गए।
जब दोनों ने ही अपने रुपये मांगें तो गुप्ता बंधु दबंगई दिखाने लगे। यहां तक की दिनेश को जाति सूचक शब्दों के साथ अपमानित करने लगे। भूप्पी और दिनेश दोनों ने ही मजिस्ट्रेट के यहां चेक बाउंस होने पर एक वाद दायर करवाया और साथ ही दिनेश ने एससी एसटी एक्ट में भी वाद कोतवाली में दर्ज कराया। जिसकी विवेचना चल रही थी। दोनों ही भाई इस बात से बहुत नाराज थे और बार-बार दिनेश के ऊपर से एससी एसटी एक्ट से जुड़ी शिकायत वापस लेने को कह रहे थे लेकिन दिनेश ने मना कर दिया था।
15 दिसंबर 2019 को पूर्वान्ह 11.30 बजे भुप्पी अपने दोस्त दिनेश सागर के साथ बाजार जा रहे थे। दूसरी बाइक पर भाजपा नेता संदीप कुकसाल भी साथ में थे। सिंधी चौराहे के पास से जब ये दोनों गुप्ता बंधुओं की दुकान के पास पहुंचे तो दोनों ही भाई ने इनको रोक दिया और दिनेश को बाइक पर से खींच लिया।
बाइक भूप्पी चला रहे थे। इसके बाद दोनों ही भाई दिनेश को मारने लगे। भूप्पी दिनेश को बचाने के लिए पहुंचे तो दोनों ही भाईयों ने अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से भूप्पी पर फायर कर दिए। यहां तक की भूप्पी की लाइसेंसी रिवॉल्वर लेकर भी भूप्पी के ऊपर गोलियां दागी गईं। मौके पर ट्रैफिक ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों ने सौरभ को पकड़ लिया, जबकि गौरव फरार हो गया था। बाद में गौरव गुप्ता मैनपुरी से गिरफ्तार हुआ था। पुलिस ने दोनों ही आरोपियों से हत्या में प्रयुक्त हुए हथियार जब्त कर लिए थे।
शिवसेना से था नाता, बाद में पार्टी ने पल्ला झाड़ा
हल्द्वानी। दोनों ही भाई शिवसेना के सक्रिय पदाधिकारी थे। हल्द्वानी के अलावा कुमाऊं मंडल में अन्य जगहों पर शिवसेना की गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते थे। हालांकि हत्याकांड के बाद शिवसेना ने दोनों से ही अपना पल्ला झाड़ लिया था। बताते हैं कि जब उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे तब दोनों भाई महाराष्ट्र में सरकार गठन के शपथग्र्रहण समारोह में भी गए थे। हालांकि बाद में शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष रूपेंद्र नागर ने कहा था कि गौरव गुप्ता और सौरभ गुप्ता का शिवसेना से कोई लेना देना नहीं है। इन दोनों को सितंबर में ही पार्टी से निकाला जा चुका है।
जेल में बंद रहते नवविवाहिता को दी थी धमकी
हल्द्वानी। भूप्पी पांडे हत्यांकाड में जेल में बंद सौरव गुप्ता ने जेल में बंद रहते हुए एक लड़की के पति को जान से मारने की धमकी दी थी। लड़की सौरव की पहले से परिचित थी। लड़की की नई शादी हुई थी। जुलाई 2023 में सौरव ने लड़की को धमकी दी कि वह जेल से बाहर आते ही तेरे पति को जान से मार दूंगा। पुलिस ने मामले की जांच भी की थी।
कोतवाल हुए थे लाइन हाजिर
हल्द्वानी। भूप्पी हत्याकांड के समय हल्द्वानी कोतवाल विक्रम राठौड़ थे। हत्याकांड के बाद लोगों ने कोतवाली में प्रदर्शन किया था। आरोप लगे थे कि पुलिस ने गुप्ता बंधुओं को शुरू से ही शह दे रखी थी, जिसके बाद उनका दुस्सासहस बढ़ गया था। इसके बाद तत्कालीन एसएसपी ने कोतवाली को लाइन हाजिर कर दिया था। दोनों ही आरोपियों पर कई मुकदमे दर्ज थे लेकिन दोनों ही शहर में सफेदफोश बनकर घूमते थे। गुप्ता बंधुओं ने चूड़ी की दुकान से शुरूआत की थी और बाद में अपराध के दाम पर कई संपत्तियां जोड़ी थीं।
ये राज्य के इतिहास में ऐसा पहला मामला था, जिसमें पूरा हत्याकांड सीसीटीवी में कैद हो गया था। सीसीटीवी की डीवीआर से आरोपियों को सजा दिलाने में बहुत मदद मिली।
-सुशील शर्मा, अभियान पक्ष के अधिवक्ता
