बरेली: पांच साल के बच्चे भी मिर्गी रोग की चपेट में आ रहे

बरेली: पांच साल के बच्चे भी मिर्गी रोग की चपेट में आ रहे

बरेली, अमृत विचार। जिले में मिर्गी रोग तेजी से पांव पसार रहा है। बड़ों के साथ बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। जिला अस्पताल स्थित मन कक्ष में हर महीने 300 से 400 मरीज मिर्गी से ग्रसित आ रहे हैं।

इनमें अधिकतर रोगियों की उम्र पांच से 25 वर्ष है। मन कक्ष प्रभारी डा. आशीष ने बताया कि मिर्गी का दौरा पड़ने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन देश में 70 फीसदी मरीजों के दिमाग में फीताकृमि होना मुख्य कारण है। बच्चों में पेट में दर्द, उल्टी आना, कब्ज, शौच के समय खून आना जैसी समस्याओं में अधिकतर कारण पेट के कीड़े होते हैं।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में आज भी हाइजीन पर ध्यान नहीं दिया जाता है, जिसके कारण पेट में गोल कृमि, फीता कृमि जैसे कीड़े पनपने लगते हैं। जब संक्रमित व्यक्ति खुले में शौच करता है तो यह कीड़े जमीन या पानी में चले जाते हैं।

सफाई न रखने से कभी गंदे हाथों या गंदे पानी से यह कीड़े पेट में जाकर आंतों से चिपक जाते हैं। एक कीड़ा दिन में 0.04 एमएल खून चूसता है। कभी-कभी कीड़ा दिमाग और शरीर के किसी भी अंग में चला जाता है।


सीटी स्कैन यूनिट नहीं हो सकी स्थापित
करीब दस महीने से जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की सुविधा बंद है। मशीन खराब होने के बाद शासन ने सीटी स्कैन यूनिट को तीन सौ बेड अस्पताल में लगाने का आदेश दिया है, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी यूनिट स्थापित नहीं हो सकी है। मरीजों को परेशानी हो रही है। मिर्गी के लक्षण वाले अधिकांश मरीजों की सीटी स्कैन जांच की आवश्यकता होती है।

इन बातों का रखें ध्यान
कृमि संक्रमण से बचाव के लिए खाना खाने से पहले ठीक प्रकार से हाथ धोएं, हरी पत्तेदार सब्जियां या फल को अच्छी तरह धोने के बाद ही खाएं, घर के आस-पास साफ-सफाई का ध्यान रखें, नाखून साफ और छोटे रखें, स्वच्छ पानी पीएं, शौच जाने के बाद हाथ साबुन से जरूर साफ करें, खुले में शौच न जाएं आदि।

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