Allahabad High Court: मूल रिकॉर्ड तलब न करने का आदेश केवल लंबित मामलों पर लागू
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान माना कि निचली अदालत के रिकॉर्ड को तलब करने के संबंध में एशियन रिसर्फेसिंग ऑफ रोड एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश केवल लंबित मामलों पर लागू होता है।
न्यायमूर्ति अजय भनोट की एकल पीठ ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मूल रिकॉर्ड तलब करने का निर्देश निचली अदालत द्वारा पूरी की गई कार्यवाही को कवर नहीं करता है। मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 37 के तहत एक अपील में निचली अदालत के रिकॉर्ड की फोटोस्टेट प्रतियां कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गईं। कोर्ट के पूछने पर रजिस्ट्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखते हुए मूल रिकॉर्ड तलब नहीं किये जा रहे हैं।
इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार जब अपील की कार्यवाही निचली अदालत के समक्ष समाप्त हो जाती है और उसे हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी जाती है तो ऐसी कार्यवाही के निर्णय के लिए मूल रिकॉर्ड आवश्यक हो जाते हैं। मूल अभिलेखों के अभाव में कोर्ट ऐसे मामलों का निस्तारण नहीं कर सकती है।
अंत में कोर्ट ने माना कि रजिस्ट्री ने एशियन रिसर्फेसिंग में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों की गलत व्याख्या ग्रहण की है। अतः कोर्ट ने रजिस्ट्री को उन सभी मामलों में ट्रायल कोर्ट के रिकार्ड तलब करने का निर्देश दिया, जहां ट्रायल कोर्ट के समक्ष कार्यवाही समाप्त हो गई है और इस ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित अंतिम आदेश को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी के तीसरे सप्ताह में सुनिश्चित की गई है।
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