Video : केजीएमयू के रिसर्च शोकेस में बोलीं प्रो.अनीता - बीमारी के इलाज के लिए करें मृत शरीर का दान
लखनऊ, अमृत विचार। एक मृत शरीर बहुत से लोगों की जान बचा सकता है, ऐसे में शरीर का अंतिम संस्कार करने से बेहतर है उसकों दान कर दिया जाये। मृत शरीर का दान करने से उस पर डॉक्टर शोध कर सकेंगे और मनुष्य में होने वाली बीमारियों का इलाज मिल सकेगा। यह बातें बैंगलोर की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस की प्रो. अनीता महादेवन ने केजीएमयू में गुरुवार को आयोजित रिसर्च शोकेस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि कहीं। इस दौरान उन्होंने देश के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों में बने ब्रेन बैंक के उपयोगिता की भी जानकारी दी। रिसर्च शोकेस कार्यक्रम का आयोजन केजीएमयू के ब्राउन हॉल में किया गया था।

प्रो. अनीता महादेवन ने कहा कि मनुष्य में होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए मनुष्य के शरीर पर ही शोध करना जरूरी है, चूंहों पर शोध करने से परिणाम बेहतर नहीं आयेंगे। इस दौरान उन्होंने पार्किंसंस रोग का जिक्र करते हुये बताया कि इस बीमारी का इलाज तभी संभव हुआ है। जब मानव ब्रेन पर शोध किया गया। इसी तरह डिमेंशिया जैसी बीमारियों का जिक्र करते हुये कहा कि इस तरह की बीमारियों पर शोध के लिए मानव ब्रेन चाहिए और यह तभी संभव है जब मृत मानव शरीर लोग दान करें। 20 घंटे के अंदर यदि मृत शरीर मिलता है तो उसको सुरक्षित रखा जा सकता है और शोध के लिए उसके ब्रेन का भी इस्तेमाल हो सकता है।
साल 1995 में बना था पहला ब्रेन बैंक
प्रो. अनीता महादेवन ने बताया कि साल 1995 में पहली बार बैंगलोर में ब्रेन बैंक की स्थापना हुई थी। मौजूदा समय में एसजीपीजीआई चंढीगढ़ और एम्स भुवनेश्वर में ब्रेन बैंक मौजूद है। जिससे मानव को होने वाली विभिन्न बीमारियों पर शोध किया जाता है। ब्रेन बैंक की जरूरत केजीएमयू में भी बताई है।
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— amrit vichar (@amritvicharlko) December 21, 2023
केजीएमयू के रिसर्च सेल की तरफ से आयोजित रिसर्च शोकेस कार्यक्रम में कुलपति प्रो.सोनिया नित्यानंद ने कुल 65 से अधिक फैकल्टी और छात्रों को 'अनुसंधान में उत्कृष्टता' के लिए प्रमाणपत्र और प्रशंसा-पत्र सौंपा है। डॉ. आनंद पाण्डेय को प्रोफ़ेसर धावेंद्र कुमार यंग इंवेस्टिगेटर गोल्ड मेडल दिया गया है। वहीं डॉ. प्रफुल्ल चंद्र तिवारी को सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट थीसिस के लिए पुरस्कार मिला है। इसके अलावा किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शामिल विभिन्न फैकल्टी सदस्यों को भी सम्मानित किया गया।
सर्वश्रेष्ठ प्रकाशन पुरस्कार पाने वाले फैकल्टी सदस्य और छात्रों
सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च के डॉ. शैलेंद्र के. सक्सेना, पैथालॉजी विभाग की डॉ. गीता यादव, न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ.हरदीप सिंह,गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. अभिजीत चंद्रा, प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के डॉ. पूरण चंद, नर्सिंग कालेज की सुधा मिश्रा, साइकाइट्री विभाग की डॉ. बबली कुमारी, सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च के मनेंद्र सिंह तोमर, 2019 एमबीबीएस बैच, सुभजीत रॉय और विनय सुरेश को पुरस्कार मिला है। इस अवसर पर प्रो. अजय पटवा और प्रो.अजय वर्मा को भी उनके शोध के लिए सम्मानित किया गया है कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रज्ञा पाण्डेय ने किया।

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