रायबरेली: जलकुंभी और प्रदूषण ने सैलानी पक्षियों को सरसपुर पक्षी विहार से किया दूर, यहां सिर्फ है अव्यवस्थाओं का बोलबाला!
जर्जर सड़कें बनीं पहचान, अधिकारियों के पास नहीं बीते चार साल का हिसाब, शिकारियों पर भी नहीं लग पा रहा अंकुश
आशीष दीक्षित, प्रदीप गुप्ता, रायबरेली। सलोन का पक्षी विहार एशिया के मशहूर पक्षी अभ्याहरण में नाम दर्ज करता है। हाल यह है कि जलकुंभी और प्रदूषण के कारण सैलानी पक्षियों ने पक्षी विहार से मुंह मोड़ लिया है। अब यूरेशिया का पक्षी यहां उड़ान भरने और घरौंदा बनाने के लिए नहीं आते हैं। पिछले चार साल से पक्षी न आने से पक्षी विहार बदहाल हो गया है। जबकि शासन स्तर पर इसे पर्यटन स्थल घोषित किया गया है लेकिन उच्चाधिकारी स्तर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। न झील की सफाई हो रही है और न ही पक्षी के माकूल वातावरण मिल रहा है।

सलोन विकास क्षेत्र में स्थित समसपुर पक्षी विहार की दशा दयनीय है। चलने लायक सड़क नहीं है। पक्षी विहार में वर्षों से बंद पड़ी कैंटीन अब वहां के के कर्मचारियों का आवास बन गया है। क्षेत्रीय वन अधिकारी के मुख्यालय पर न रहने के कारण पक्षी विहार में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। लगभग एक दशक पूर्व प्रकृति के सौंदर्य का विहंगम दृश्य समेटे चारों ओर झील के पानी का पसरा हुआ सम्राज्य स्थापित था।

टूटी सड़कें बदहाल व्यवस्था के साथ उपेक्षा पर रो रहे पक्षी विहार में अब दूसरे देशों से प्राकृति वास के लिये आने वाले परिंदे भी दिखाई नहीं देते। पक्षी विहार में पर्यटकों से होने वाली आय वर्ष 2017-18 के सापेक्ष वर्ष 2018-19 में 9 हजार 310 रुपये का कम मुनाफा हुआ। वहीं अब ताजा स्थित की बात करें तो समसपुर में तैनात अधिकारियों को ही सालाना आमदनी की जानकारी नहीं है। असल में कोरोनाकाल के बाद से पक्षियों ने यहां आना बंद कर दिया है।
जलकुंभी से पूरी झली पटी पड़ी है तो साथ ही प्रदूषण होने से पक्षी यहां नहीं आ रहे हैं। वहीं झील में बड़ी संख्या में मांगुर मछली हैं जिस कारण इनका शिकारी शिकार करते हैं और इस कारण भी पक्षी झील में नहीं आते हैं। यही नहीं शिकारियों द्वारा विदेशी पक्षियों का भी शिकार किया जाता रहा है । यह वजह भी पक्षियों को समसपुर से दूर किए हुए है।
सुंदरीकरण के लिए बिना अनुमोदन, काम नहीं हो सका शुरू
एशिया के मानचित्र में अपना नाम दर्ज कराने वाला समसपुर पक्षी विहार पर्यटक स्थल के सौंदर्यीकरण के लिए पर्यटन विभाग से अनुमोदन मिल गया है लेकिन अभी तक कार्य शुरू नही किया गया है। वर्ष 1987 में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने समसपुर पक्षी विहार की नींव रखी थी। वन प्राणियों की विविधता एवं प्रचुरता इस प्रदेश की बहुमूल्य प्राक्रतिक विरासत हैं। 799.371 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस समसपुर पक्षी विहार झील को क्षेत्र की छह झीलों को जोड़कर निर्मित किया गया है।
शिकारियों पर नहीं लग सका अंकुश
आसपास के लोगों का कहना है कि यहां आने वाले पक्षी अक्सर आस-पास के क्षेत्रों और खेतों में चले जाते है। जहां ताड़ में बैठे शिकारी इनका शिकार कर लेते है। इसमें समसपुर के अधिकारियों की कही ना कही संलिप्तता रहती है। आजतक एक भी शिकारी को पकड़ा नही जा सका है। देवेश शुक्ला उर्फ महंत प्रधान प्रतिनिधि ममुनी का कहना है कि पक्षी विहार का जिस तरह विकास होना चाहिये उस तरह नही होता है। यहां के अधिकारी सरकारी धन का दुरुपयोग करते हैं।जिसके कारण विकास कार्य बाधित हो रहा है।
वेटलैंड होने के बाद भी नहीं बुहुरे दिन
बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्रारा इस पक्षी विहार को इम्पार्टेंट बर्ड एरिया घोषित किया गया हैं।साथ ही इस पक्षी विहार को भारत सरकार द्रारा नेशनल वेटलैण्ड कंजर्वेशन प्रोग्राम के अन्तर्गत विकसित करने हेतु चयनित किया गया हैं।इसके बावजूद अव्यवस्थाओं ने यहां की स्थित को बदत्तर कर दिया है।
समसपुर पक्षी विहार की सड़कें गड्ढे में तब्दील
समसपुर पक्षी विहार जाने वाली सड़क बोल्डर युक्त है। एक कदम चलना मुश्किल है तो ऐसे में पर्यटकों का आना नामुमकिन है। वहीं झील परिसर में दौड़ रही प्रदूषित गाडियों व छुट्टा घूम रहे जानवरों की आवाजाही शोरगुल से पक्षियों के मोह भंग कर दिया है।
पर्यटकों के लिये बनी कैंटीन रहती है बंद
यहां आने वाले पर्यटकों के लिये खोली गई चाय व नाश्ते की कैंटीन भी विगत कई वर्षों से बन्द पड़ी है। पिछले चार सालों में इस पक्षी विहार का आस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
कभी यह पक्षी यहां करते थे अठखेली
पक्षी विहार में हजारों किलोमीटर की दूरी तय करके आने वाले प्रवासी पक्षी ग्रेलैग गूज, बारहेडेड गूज, पिन टेल, कॉमन टील, गैरगनी टील, विजन, गैंडवल, शावलर, रुडी शेलडक, मैलर्ड, मार्श हैरियर, पेलिकन मार्श, सैडपाइपर आदि प्रवासी पक्षी आते थे। जब कि स्थानीय पक्षियों में कोयल, मोर, सारस, क्रेन, कॉम्ब डक, त तर, स्पून बिल, ¨कग फिशर, इगरेट, हुदहुद, ब्लैक आइविस, लिटिल ग्रीब, जंगल बैबलर, डव इत्यादि पक्षी समसपुर पक्षी विहार की शोभा बढ़ाते रहे हैं।
इस मामले में डीएफओ से बात कर मामले की जांच कराई जाएगी। समसपुर पक्षी विहार हेरीटेज है जिसके लिए प्रशासनिक स्तर पर सारे प्रयास किए जाएंगे।
प्रफुल्ल त्रिपाठी, एडीएम प्रशासन
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