बस्ती : मतस्य पालन और बागवानी से बदलेगी सूरत, किसानों की आय दोगुना करने के लिए युद्ध स्तर पर हो रहा कार्य
बस्ती, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में किसानों की पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य पालन और बागवानी के जरिये आय बढ़ाने की कवायद जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है। इसके तहत जिले के गांवों में मनरेगा के तहत तालाबों की खुदाई की गई है। तालाबों में मछली पालन के साथ केले के पौधे लगाये गये हैं। जिससे वहां की तस्वीर बदलने लगी है।
जनपद में जिला प्रशासन के सहयोग से #एमजीएनआरईजीएस(मनरेगा) योजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर विकसित किए गए 1085 तालाबों में केला एवं मछली पालन की एकीकृत खेती को बढावा दिया जा रहा है,जो समूहों की #आयमेंवृद्धि हेतु सहायक होंगी।@CMOfficeUP @UPGovt @ChiefSecyUP @ShishirGoUP pic.twitter.com/t1xV77HmCq
— DM BASTI (@dmbas_) February 5, 2024
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार मत्स्य पालन और बागवानी को लगातार बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। जिसमें केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मनरेगा की मदद से जिले के तालाबों में मछली पालन और किनारे पर केले की बागवानी का कार्य चल रहा है। जिले के डीएम आंद्रा वामसी ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। यही वजह की जनपद के सभी 14 विकास खण्ड में स्थित 1111 तालाबों में से 1085 तालाबों में मत्स्य अंगुलिका संचय का कार्य पूरा कर लिया गया है। इतना ही नहीं इन सभी तालाबों के किनारे करीब 42493 केले के पौधें भी लगाये जा चुके हैं।
डीएम आंद्रा वामसी के नेतृत्व में सीडीओ, डीडीओ, बीडीओ, एडीओ, वीडीओ, ग्राम सचिवों और प्रधानों की मेहनत रंग ला रही है। बताया जा रहा है कि तालाबों के किनारे केले के पौधे रोपित करने से न सिर्फ बागवानी को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि मत्स्य पालन और केले के संयुक्त कारोबार से संबंधित ग्राम पंचायतों के किसानों की आय भी बढ़ेगी। इस योजना के तहत महिलाओं का समूह भी मछली पालन और केले की बागवानी से आत्मनिर्भर होगा।

कार्य
1. केले फार्म तालाबों की संख्या - 1085 तालाब
2. केले के पौधों की संख्या- 42493 पौधे
3. 1085 गांव में हुआ कार्य
5. प्रति तालाब खर्च की गई राशि- 1.28 लाख - 6 लाख रुपये
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