रुद्रपुर: जनसुनवाई में 34 उपभोक्ताओं ने आयोग के समक्ष रखे सुझाव और आपत्तियां
बिजली कंपनियों के वर्ष 2024-25 में टैरिफ 27 फीसदी करने के प्रस्ताव पर मांगे सुझाव
रुद्रपुर, अमृत विचार। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग की ओर से राज्य में विद्युत दरों के प्रस्ताव पर जन सुनवाई की। इस दौरान आयोग के समक्ष यूपीसीएल, पिटकुल, यूजेवीएन एवं एसएलडीसी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए टैरिफ में 27 प्रतिशत की वृद्धि करने का प्रस्ताव रखा। इस पर उद्योगपतियों, किसानों और अन्य उपभोक्ताओं ने इस टैरिफ पर नाराजगी जतायी। साथ ही 34 उपभोक्ताओं ने आयोग के समक्ष सुझाव और आपत्तियां रखी।
मंगलवार को विकास भवन सभागार में आयोग के अध्यक्ष डीपी गैरोला की अध्यक्षता में जनसुनवाई हुई। इस दौरान आयोग ने आम उपभोक्ताओं का पक्ष सुना। इस दौरान आयोग ने जनसुनवाई के दौरान घरेलू एवं अघरेलू श्रेणी, उद्योग श्रेणी, पीटीडब्लू के उपभोक्ताओं के सुझावों एवं आपत्तियों को सुना। इस दौरान किसानों, उद्योगपतियों ने 27 प्रतिशत बिजली की दरों में बढ़ोतरी पर नाराजगी व्यक्त की। किसानों ने कहा कि पहले ही किसान महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऐसे में बिजली की दरें बढ़ने से उन्हें काफी नुकसान होगा।
वहीं उद्योगपतियों ने कहा कि उद्योगों में माह में 25 दिन तक बिजली की ट्रिपिंग होती है। इसके अलावा अन्य राज्यों से उत्तराखंड में बिजली के रेट काफी अधिक हैं। जबकि हिमाचल प्रदेश में बिजली की रेट कम हैं। अगर बिजली के रेट बढ़े तो उद्योगों को चलाना मुश्किल होगा और बंद करने के बाध्य होना पड़ेगा। वहीं आयोग अध्यक्ष गैरोला ने सभी का पक्ष सुनने के बाद कहा कि नई बिजली की दरें एक अप्रैल 2024 से लागू होंगी। हालांकि अभी कोशिश रहेगी की बिजली की दरें कम हों।
उन्होंने कहा कि पहले उत्तराखंड में पर्याप्त बिजली थी, लेकिन अब उद्योगों के बढ़ने से इतनी बिजली की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। फिर कोशिश रहेगी की कंपनी बाहर न जाए। जन-सुनवाई में सदस्य (तकनीकी) उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग मदन लाल प्रसाद, सचिव नीरज सती, निदेशक वित्त दीपक पांडे, निदेशक (तकनीकी) प्रभात किशोर डिमरी, उप निदेशक प्रशासन दीपक कुमार, अधीक्षण अभियंता शेखर त्रिपाठी, नवीन मिश्रा, अधिशासी अभियंता जीएस कार्की, विजय कुमार सकारिया समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
चारों बिजली कंपनियों के एमडी को नोटिस भेजने के निर्देश
रुद्रपुर। जनसुनवाई में यूपीसीएल, पिटकुल, यूजेवीएन एवं एसएलडीसी के एमडी उपस्थित नहीं थी। इस पर आयोग के अध्यक्ष गैराला ने नाराजगी जतायी। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में सभी को उपस्थित रहना चाहिए था। उन्होंने सभी को नोटिस भेजने के निर्देश दिये।
यूपीसीएल की ओर से 27 प्रतिशत की दर रखी गयी है, जबकि अन्य कंपनियों की दर को भी इसमें शामिल किया जाएगा तो यह 38 प्रतिशत हो जाएगा। जबकि अन्य प्रदेशों में बिजली की दर कम है। राज्य भी उसी श्रेणी की ओर जा रहा है। एक अप्रैल से इसे लागू किया जाएगा। अगर बिजली की दर बढ़ी तो कई उद्योग बंद हो सकते हैं। इसलिए उद्योग भी चाहते हैं कि बिजली की दर न बढ़े।
-शकील सिद्दीकी, इंडस्ट्रियल एडवाइजर
उत्तराखंड में बिजली की दर हिमाचल से डेढ़ गुना अधिक है। नये बिजली की 27 प्रतिशत दर काफी अधिक है। उद्योगों में बिजली की सप्लाई ठीक नहीं है। माह में 25 बार बिजली की ट्रिपिंग होती है। उद्योगों का कच्चा माल भी बाहर से आता है। ऐसे में बिजली के दर बढ़ने से उद्योगों को काफी नुकसान होगा और बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
-मुकेश त्यागी, एमडी, बीएसटी टैक्सटाइल मिल
एक तरफ सरकार नये उद्योगों को बुला रही है, जबकि दूसरी ओर बिजली की दरों को बढ़ा रही है। इससे नये उद्योगों और पुराने उद्योगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इससे कंपनियां पलायन कर सकती है। वहीं बिजली की बढ़ती दरों के कारण एक दो उद्योगों ने अपनी मशीन शिफ्ट कर दी है। अगर बिजली के रेट बढ़ते हैं तो भविष्य में अन्य उद्योग भी अपनी मशीन शिफ्ट कर सकते हैं।
-श्रीकर सिंहा, अध्यक्ष, सिडकुल इंटरप्रेन्योर वेलफेयर सोसायटी
