पीलीभीत: नाबालिग ही थी सामूहिक विवाह में शादी करने वाली लड़की, पेश हुए दोनों पक्ष...अब ससुराल न भेजने और शिक्षा दिलाने का दिया शपथ पत्र

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Edited By Amrit Vichar
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पीलीभीत, अमृत विचार। सामूहिक विवाह समारोह में समाज कल्याण विभाग ने जिस लड़की को बालिग बताते हुए शादी करा दी थी, स्कूली अभिलेखों की पड़ताल में वह लड़की नाबालिग निकली। वहीं लड़का-लड़की पक्ष के लोग बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित हुए और शपथ पत्र सौंपा। इधर जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा गठित टीम ने लड़की के घर पहुंचकर जांच की। इधर इस मामले में समाज कल्याण विभाग चौथे दिन भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका।

माधोटांडा थाना क्षेत्र की एक महिला द्वारा उसकी नाबालिग पुत्री की शादी सामूहिक विवाह समारोह में कराने के मामले में हुई शिकायत के बाद चल रही जांच के दौरान स्कूली अभिलेखों में लड़की नाबालिग पाई गई है। जांच के दौरान लड़की की टीसी से उसकी उम्र का खुलासा हुआ है। ऐसे में अब यह साफ हो चुका है कि 27 जनवरी को समाज कल्याण विभाग की ओर से किए गए सामूहिक विवाह समारोह में नाबालिग लड़की की ही शादी कराई गई थी। 

इधर लड़का एवं लड़की पक्ष के लोग जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित हुए। दोनों पक्षों में समिति को शपथ पत्र भी सौंपे। सौंपे गए शपथ पत्र में कहा गया कि लड़की की आयु 18 वर्ष न होने तक उसे ससुराल नहीं भेजा जाएगा। साथ उसे शिक्षा भी दिलाई जाएगी। शपथ पत्र में उन्होंने भूलवश ऐसा करना स्वीकारा है।

इधर जिला प्रोबेशन अधिकारी प्रगति गुप्ता ने दिए गए शपथ पत्र की सत्यता जानने के लिए शनिवार को गठित चार सदस्यीय टीम को लड़की के कलीनगर स्थित घर भेजा है। जहां टीम इस बात की जांच करेगी कि लड़की घर में ही है अथवा ससुराल में है। इसके अलावा लड़की की पढ़ाई-लिखाई से संबंधित भी जानकारी ली जाएगी।

दो एडीओ कर रहे मामले की जांच
इधर समाज कल्याण विभाग भी इस मामले की पड़ताल में जुट गया है। समाज कल्याण अधिकारी चंद्रमोहन विश्नोई ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। इसमें टीम में एडीओ समाज कल्याण पूरनपुर नरेंद्र कुमार और एडीओ बिलसंडा को नामित किया है। यह दो सदस्यीय टीम आधार कार्ड समेत अन्य अभिलेखों की पड़ताल कर रही है। फिलहाल अधिकारी इस मामले में रिकवरी करने की बात पहले की कह चुके हैं। अब जांच के बाद इसमें और क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा।

बड़ा सवाल- सत्यापन के दौरान प्राप्त अभिलेखों में क्या देखा?
इस मामले में अब तक चली जांच के बाद लड़की के नाबालिग होने का पता चल चुका है। सामूहिक विवाह में आने वाले आवेदनों का सत्यापन भी कराया जाता है।  ऐसे में ये कहना भी गलत नहीं होगा कि उस वक्त जिम्मेदार कहीं न कहीं लापरवाही बरत गए।  लड़की की शादी के लिए दिए गए अभिलेखों का गहनता से सत्यापन नहीं किया गया।  वरना, अब जो खामियां निकलकर सामने आ रही हैं, उस वक्त भी पकड़ी जा सकती थी। 

पुलिस भी विवेचना में जुटा रही साक्ष्य
प्रशासनिक स्तर पर चल रही जांच के अलावा इस मामले में लड़की मां ने अपने जेठ व अन्य लोगों के खिलाफ बाल विवाह, धोखाधड़ी आदि आरोपों में एफआईआर सदर कोतवाली में दर्ज करा रखी है। जिसकी विवेचना कोतवाली पुलिस कर रही है। उसमें मां का आरोप है कि जेठ बरेली अस्पताल से नाबालिग बेटी को पिता से मिलाने की बात कहकर ले गया था और फिर फर्जी प्रपत्र बनवाकर शादी करा दी गई। इन आरोपों की सत्यता जानने के लिए पुलिस भी विवेचना में साक्ष्य जुटा रही है।

स्कूली अभिलेखों में लड़की नाबालिग पाई गई है। दोनों पक्षों द्वारा जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित होकर शपथ पत्र दिए गए हैं। शपथ पत्र की सत्यता जानने के लिए टीम को भेजा गया है। - प्रगति गुप्ता, जिला प्रोबेशन अधिकारी

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