लखनऊ : विधान परिषद के नवनिर्वाचित 13 सदस्यों ने सदस्यता की शपथ ली 

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अमृत विचार, लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के नवनिर्वाचित 13 सदस्यों को शुक्रवार को सदन की सदस्यता की शपथ दिलायी गयी। एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से नवनिर्वाचित 13 सदस्‍यों को शुक्रवार शाम सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने विधान भवन के तिलक हाल में सदस्यता की शपथ दिलायी।

शपथ लेने वाले विधान परिषद सदस्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के डॉ. महेंद्र सिंह, विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया, रामतीरथ सिंघल, संतोष सिंह, धर्मेंद्र सिंह और मोहित बेनीवाल शामिल हैं। वहीं भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सहयोगी दल अपना दल (एस) के आशीष पटेल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विच्छेलाल और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के योगेश चौधरी ने भी शपथ ली।

इसके अलावा समाजवादी पार्टी के सदस्य बलराम यादव, शाह आलम एवं किरण पाल कश्यप को भी सभापति ने शपथ दिलायी। सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद उत्तर प्रदेश की 100 सदस्यीय विधान परिषद में अब प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को नेता विरोधी दल का दर्जा मिल जाएगा। अभी तक सपा के पास सदन में निर्धारित सदस्य संख्या न होने से आधिकारिक रूप से पार्टी को यह दर्जा नहीं मिला था। विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि परिषद में नेता विरोधी दल का दर्जा हासिल करने के लिए प्रमुख विपक्षी दल के सदस्‍यों की संख्‍या कम से कम 10 होनी चाहिए।

विधान परिषद की वेबसाइट के अनुसार उत्तर प्रदेश के विधान परिषद में इस समय सत्‍तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 78 सदस्य हैं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (एस), निषाद पार्टी, सुभासपा और रालोद के सदस्यों की एक-एक संख्या है। सदन में प्रमुख विपक्षी समाजवादी पार्टी के सदस्‍यों की संख्‍या 10 हो गयी है। शिक्षक दल और निर्दलीय मिलाकर पांच अन्‍य सदस्‍य हैं। अन्य सीटें रिक्त हैं।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव में 14 मार्च को कुल 13 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया था, जिनमें राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दस और सपा के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। सहायक निर्वाचन अधिकारी राम औतार सिंह ने एक बयान में कहा था कि उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्यों द्वारा विधान परिषद के द्विवार्षिक निर्वाचन 2024 में 14 मार्च को नाम वापसी की आखिरी तिथि की समय सीमा समाप्त होने के उपरांत सभी 13 प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

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