बरेली: सफाई कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा शहर, अफसरों के आवास पर कर रहे ड्यूटी
बरेली, अमृत विचार। सफाई कर्मचारियों की कमी के कारण नगर निगम ने वार्डों की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों मे देने की योजना है। क्योंकि स्वच्छता की रैकिंग में शहर का प्रदर्शन 2021 में बेहतर करना है। लेकिन स्मार्ट सिटी में सफाई के लिए आबादी के हिसाब से करीब 800 सफाई कर्मचारियों की कमी है। …
बरेली, अमृत विचार। सफाई कर्मचारियों की कमी के कारण नगर निगम ने वार्डों की सफाई व्यवस्था को निजी हाथों मे देने की योजना है। क्योंकि स्वच्छता की रैकिंग में शहर का प्रदर्शन 2021 में बेहतर करना है। लेकिन स्मार्ट सिटी में सफाई के लिए आबादी के हिसाब से करीब 800 सफाई कर्मचारियों की कमी है। इसके चलते सफाई व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। दूसरी तरफ सफाई कर्मचारियों से दूसरा कार्य लेने के कारण वार्डों में कर्मचारियों की कमी है। यहां तक की जिम्मेदार अफसरों के आवास पर भी एक से अधिक सफाई कर्मचारियों से कार्य लिया जा रहा है।
नगर निगम के 80 वार्डों में सफाई व्यवस्था के लिये स्थाई कर्मचारियों के साथ संविदा के सफाई कर्मचारियों की संख्या 1900 है। इसमें चौकाने वाली बात यह हैं कि जिन सफाई कर्मचारियों के कंधे पर शहर की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी है, उनमें से 100 को कूड़ा गाड़ियों को चलाने के लिए चालक के रूप में तैनात कर दिया गया है। वहीं, 100 को सफाई नायक बनाया गया है। कुल सफाई कर्मचारियों में 600 के करीब संविदा के सफाई कर्मचारी है। सूत्रों की बातों पर गौर करें तो सफाई कर्मचारियों की तैनाती का नियतन काफी पुराना है।
आबादी में 10 गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। वार्ड की संख्या में इजाफा हुआ है। पहले जब पद सृजित हुआ था तो पास के गांवों को नगर निगम में शामिल नहीं किया गया था। अब निगम का क्षेत्र भी बढ़ गया है लेकिन सफाई कर्मचारियों की संख्या आबादी के हिसाब नहीं बढ़ी है। इसके कारण शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। अब सवाल है कि शहर को स्वच्छ करने का दावा करने वाले अफसर कैसे बिना सफाई कर्मचारियों के वार्डों को चकाचक करेंगे।
अधिकांश वार्ड सफाई कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। यहां तक की कई ऐसे वार्ड है कि जिनकी आबादी 30 हजार तक पहुंच चुकी है, लेकिन सफाई कर्मचारी महज पांच है। कई जगहों पर तो एक व दो सफाई कर्मचारियों के भरोसे वार्ड के सफाई की जिम्मेदारी है। जबकि दूसरी तरफ स्थाई व संविदा दोनों प्रकार की नियुक्ति काफी दिनों से नहीं हो रही है।
