Kannauj: समाज कल्याण विभाग का सुपरवाइजर निलंबित; रिश्वत लेने का था आरोप, जेल जाने के बाद निदेशक ने की कार्रवाई

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर डीडी कार्यालय में संबद्ध, छूटने के बाद ही कर सकेगा ड्यूटी

कन्नौज, अमृत विचार। समाज कल्याण विभाग के रिश्वत लेने के आरोपी सुपरवाइजर को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई निदेशक कुमार प्रशांत ने की है। लखनऊ जेल में बंद आरोपी को डीडी कानपुर कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है। हालांकि छूटने के बाद ही वह नई तैनाती वाली जगह पर ड्यूटी कर सकेगा। 

सदर कन्नौज से भाजपा विधायक व समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विभाग के सुपरवाइजर हृदेश यादव के खिलाफ डीएलएड के छात्र से 8250 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पीड़ित डीएलएड करने वाला छात्र ममतांजय वर्मा तिर्वा कस्बे के मोहल्ला गांधीनगर निवासी है। उसके मित्र अभय वर्मा निवासी मोहल्ला सुभाषनगर तिर्वा से भी रुपये लिए गए थे। 

पीड़ित छात्रों के पीछे हटने से ही खुद मंत्री ने यह रिपोर्ट सदर कोतवाली में 19 जुलाई को दर्ज कराई थी। उसके दो-तीन दिन में ही आरोपी की गिरफ्तारी कर लखनऊ जेल भेज दिया गया। इसी के बाद एक और खुलासा हुआ कि तहसील कन्नौज में संबद्ध हृदेश यादव ड्यूटी में नहीं जाता था। 

समाज कल्याण विभाग से संबंधित कोई प्रकरण जब एसडीएम सदर के समक्ष पहुंचा तो उसे सुपरवाइजर को बुलाया गया। उसके न मिलने पर ही पता चला कि हृदेश तो कार्यालय आता ही नहीं है। इतना ही नहीं पे-रोल पर एसडीएम के फर्जी हस्ताक्षर के बाद उसकी सैलरी भी निकल गई। फिलहाल हृदेश जेल में ही बंद हैं। वह इटावा के सैफई इलाके का मूल निवासी है। 

जिला समाज कल्याण अधिकारी एसपी सिंह ने बताया कि निदेशक का पत्र पहली जुलाई को मिला है। उसमें हृदेश को निलंबित करने का जिक्र है। साथ ही कानपुर में संबद्ध किया गया है। जब आरोपी जेल से छूटेगा तो कानपुर डीडी कार्यालय में रिपोर्ट करेगा। उन्होंने बताया कि आरोपी के खिलाफ कई शिकायतें थीं, जिसके बाद कार्रवाई की गई है। 

खास बात यह है कि समाज कल्याण विभाग में तैनात होने के बावजूद उसने पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति दिलाने का सौदा कर लिया था जबकि दोनों ही छात्रों के आवेदन कमियों के चलते निरस्त हो चुके थे। इसमें लाभ नहीं मिल सकता है। विभागीय अधिकारी को जब इसकी जानकारी हुई थी तो वह दंग रह गए थे कि उनके विभाग को बेवजह बदनाम किया जा रहा है। दूसरे विभाग के कर्मी ने रिश्वत भी ले ली।

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