गोंडा: चार महीना भी नहीं चल सकी 5 साल की गारंटी वाली सड़क, पहली बारिश में ही बही

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Edited By Amrit Vichar
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मार्च महीने में बनी थी प्रधानमंत्री योजना वाली सड़क, ग्रामीणों ने सड़क की गुणवत्ता पर उठाए सवाल 

गोंडा, अमृत विचार। 5 साल की गारंटी वाली सड़क 4 महीना भी नहीं झेल सकी और पहली बारिश में ही बह गयी।‌ सड़क का 10 मीटर हिस्सा पानी के तेज बहाव में कटकर गायब हो गया। सड़क कटने से 50 से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से करते हुए सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा किया है और इसकी जांच कराए जाने की मांग की है‌। 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2023 में सोनबरसा मोतीगंज मार्ग से भरीवा चौराहा से निकलकर मूसापुर- दुर्जनपुर होते हुए दिनारा तक जाने वाली 9 किलोमीटर लंबी सड़क की स्वीकृति मिली थी। 5.90 करोड़ रुपए की लागत से इस सड़क का निर्माण कार्य इसी वर्ष मार्च महीने में पूरा हुआ था। इस सड़क के बन जाने भरीवा बाजार, पिपरा भिटौरा, मूसापुर, दुर्जनपुर, तेंदुआ मोहिनी, तेंदुआ भगत, कपिसा, इमिलिया रुपी समेत 50 से अधिक छोटे बड़े गांवों के लोगों का आवागमन आसान हो गया था। 

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भरीवा चौराहे पर लगा कार्यदायी संस्था का साइन बोर्ड

कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से बहराइच जिले की मेसर्स ईसान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने इसका निर्माण कराया था। सड़क के मजबूती की पांच वर्ष की गारंटी थी लेकिन पांच साल की गारंटी वाली यह सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल सकी और महज चार महीने के भीतर ही पानी के तेज बहाव में बह गयी। पिपरा भिटौरा गांव के पास इस सड़क का करीब 10 मीटर हिस्सा कटकर पानी में बह गया है। सड़क कटने से यहां के हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है। वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से थम गयी है। बाइक सवार किसी तरह इस सडक से निकल रहे हैं। 

क्षेत्र के गुड्डू पंडित, छोटकऊ पांडेय, लल्लन पाठक, अजीत मिश्रा, तुलाराम वर्मा, सहज राम वर्मा प्रधान तेंदुआ मोहिनी, कृष्ण गोपाल मिश्रा प्रधान मूसापुर, बलराम वर्मा,  संतोष मिश्रा,  वेद प्रकाश शुक्ला, अमरेश पांडेय, रामजी वर्मा व सुरेंद्र कुमार ने सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाया है।  पिपरा भिटौरा के रहने वाले गुड्डू पंडित का कहना है कि सक बनाते समय कहा गया था कि पांच साल तक इसकी गारंटी है लेकिन सिर्फ चार महीने में सडक और गारंटी दोनों पानी में बह गयी। अगर निर्माण के समय इसकी गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया होता तो 6 करोड़ रुपये से बनी इस सड़क की यह दुर्दशा नहीं होती। 

सड़क टूट फूट के मरम्मत की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की
सडक निर्माण से जुड़े लोगों की माने तो प्रधानमंत्री ग्राम सडक योजना के चहत‌बनायी जाने वाली सड़कों की पांच वर्ष तक गारंटी होती है‌। पांच साल के भीतर यदि इसमें किसी तरह की खराबी होती है या टूट फूट होती है तो इसके मरम्मत की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था की होती है‌। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क कटे 15 दिन से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन न तो विभाग कम अधिकारी इसे देखने आए और न ही कार्यदायी संस्था के लोगों ने मरम्मत करायी। अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर की गयी है।

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