बरेली: रेंज के खूनी मोड़ों ने नौ माह में ली 843 लोगों की जान
संजय शर्मा, बरेली। रेंज के खूनी मोड़ों और चौराहों पर दौड़ रहे तेज रफ्तार वाहनों से हुए 763 हादसों में 843 लोगों की जान चली गई। वहीं, 942 लोग घायल हुए और उनमें से सैकड़ों लोगों को अपने शरीर के अंग खोने पड़ गए। जोन में 32 ऐसी जगह चिह्नित की गई है जहां रोज …
संजय शर्मा, बरेली। रेंज के खूनी मोड़ों और चौराहों पर दौड़ रहे तेज रफ्तार वाहनों से हुए 763 हादसों में 843 लोगों की जान चली गई। वहीं, 942 लोग घायल हुए और उनमें से सैकड़ों लोगों को अपने शरीर के अंग खोने पड़ गए। जोन में 32 ऐसी जगह चिह्नित की गई है जहां रोज कोई न कोई हादसा होता ही है। वहीं, पुलिस ने बिना परमिट के वाहन चलाने वाले 744 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।
जोन में अगर सड़क हादसों की बात करें तो बरेली के हॉट स्पॉटों ने सबसे अधिक लोगों की जान गई है। यहां के बड़ा बाईपास पर खूनी मोड़ तेज रफ्तार से दौड़ रहे वाहन चालक को कभी भी मौत की गहरी नींद सुला देते हैं। एक छोटी से चूक यहां जिंदा रहने का मौका नहीं देती। जनवरी से अब तक बरेली जिले में 257 घातक हादसे हुए। इन हादसों में 263 लोगों की जान गई। इसके साथ ही जिले में 279 साधारण हादसे हुए। इनमें 326 लोगों में कुछ गंभीर और कुछ साधारण रूप से घायल हुए।
वहीं बरेली में तीन बिथरी, सीबीगंज और बारादरी में सबसे अधिक हादसे हुए। इसके बाद बदायूं में सबसे अधिक सड़क हादसे हुए। यहां 251 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 200 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। वहीं, पीलीभीत में 40 घातक हादसे हुए और इसमें 90 लोगों की जान गई। साथ ही 127 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इसके साथ ही शाहजहांपुर में 225 घातक हादसों में 239 लोगों की जान गई और 233 साधारण हादसों में 289 लोग घायल हुए। वहीं, सबसे अधिक हादसे होने वाले जगहों को जब चिह्नित किया गया तो बरेली में तीन प्वाइंट, बदायूं में छह प्वाइंट, पीलीभीत में 13 प्वाइंट और शाहजहांपुर में 10 जगहों को चिह्नित किया गया है।
2019 में गई थी 543 लोगों की जान
2019 में बरेली जिले में 410 हादसे हुए थे। इनमें से सबसे अधिक हादसे बड़ा बाईपास पर हुए थे। इन हादसे में 543 लोगों की जान गई थी। वहीं, इतने ही लोग लगभग सड़क हादसों में घायल भी हुए थे।
रेंज में सबसे अधिक हादसे बरेली जिले में हुए हैं। यहां बड़ा बाईपास पर सबसे अधिक लोग हादसों में मौत का शिकार हुए हैं। वहीं, पीलीभीत में सबसे कम हादसे हुए और कम लोगों की जान गई। -राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी
