Bareilly: आपदा में भी हुआ झोल...करोड़ों की धनराशि खर्च में पकड़ीं वित्तीय अनियमितताएं

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Edited By Amrit Vichar
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2020 में हुई विशेष संपरीक्षा, प्रशासन चार साल से बिंदुवार आख्या राहत आयुक्त कार्यालय को नहीं भेज रहा, कई डीएम बदल गए

राकेश शर्मा, बरेली। कोविड काल के दौरान राज्य आपदा मोचक निधि से जिले को मिली करोड़ों रुपये की धनराशि के खर्चे में नियमों का पालन नहीं किया गया। चार साल पहले धनराशि की विशेष संपरीक्षा में आठ बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं।

निशुल्क खाद्य वितरण योजना में जिले के लाखों कार्डधारकों को योजना के लाभ से वंचित रखने की आशंका जताने के साथ वित्तीय नियमों के विपरीत कई अन्य मदों में धनराशि खर्च करने की बात सामने आई। आडिट प्रत्यावेदन भेजकर बिंदुवार जिला प्रशासन से आख्या मांगी गई तो चार साल तक इस प्रकरण को दबाए रखा। अब फिर उन्हीं बिंदुओं पर बिंदुवार आख्या तलब की गई है।

आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा उप्र के निदेशक की ओर 30 दिसंबर, 2020 को राजस्व विभाग के सचिव को लिखे गए पत्र के अनुसार राज्य आपदा मोचक निधि के अंतर्गत कोविड-19 के दृष्टिगत राजस्व विभाग की ओर से कार्यालय जिलाधिकारी बरेली को वर्ष 2019-20 एवं 2020-21 में आवंटित धनराशि के सापेक्ष व्यय धनराशि का विशेष संपरीक्षा की गई। यह संपरीक्षा 26 अक्टूबर 2020 से 31 अक्टूबर 2020 के मध्य संपादित की गई।

संपरीक्षा में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं प्रकाश में आईं। उनका उल्लेख प्रतिवेदन के भाग-2 ''अ'' ''2 ब'' में किया गया है। आठ मामलों में वित्तीय अनियमितताएं पकड़ी गई थीं, लेकिन उनपर बिंदुवार आख्या नहीं भेजी गई। जबकि इस बीच कई जिलाधिकारी बदल गए। करीब चार साल से मामले को अधिकारी ठंडे बस्ते में डाले रहे।

इधर, 23 दिसंबर 2024 को वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष कुमार की ओर से जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया। कई दिन के बाद महत्वपूर्ण पत्र प्रत्यावेदन के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचा। इस पत्र में वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी ने लिखा है कि राज्य आपदा मोचन निधि से आवंटित धनराशि के सापेक्ष व्यय की गई धनराशि की विशेष संपरीक्षा उपरांत ऑडिट प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, लेकिन उक्त आडिट प्रत्यावेदन पर आख्या अभी तक अप्राप्त है। जिलाधिकारी से आडिट प्रत्यावेदन में उठाईं आपत्तियों पर शीघ्र कार्यवाही कराते हुए बिंदुवार आख्या राहत आयुक्त कार्यालय को 15 दिन में उपलब्ध कराने की बात पत्र में लिखी गई है।

संपरीक्षा में इन बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं
निशुल्क खाद्य वितरण योजना के अंतर्गत जिले के कुल कार्डधारक 7.95 लाख के सापेक्ष मात्र 25 प्रतिशत (2 लाख) कार्ड धारकों पर प्रति माह औसतन 1.40 करोड़ की धनराशि का ही व्यय किया गया है, इसमें शासन की मंशा के विपरीत यानी शत प्रतिशत लाभार्थियों को योजना के लाभ से वंचित रखने जाने की आशंका जताई है। कोटेदारों के खाते में अंतरण के लिए 1,77,259 रुपये की शासकीय धनराशि अवरुद्ध रही है।

  • डीबीटी के माध्यम से लाभार्थियों के खाते में अंतरण की गई धनराशि 1.97 करोड़ रुपये के सापेक्ष दृष्टांत के रूप में शासकीय धनराशि 4, 66,000 अवरुद्ध पाई गई।

  • बिना टीडीएस कटौती व बीजकों पर पेड एंड कैंसिल पासेस फॉर पेमेंट का अंकन किए बिना ही मेडिकल कन्ज्यूमेबिल सामग्री क्रय की गई। 160.22 लाख रुपये का अनियमित भुगतान किया गया।

  • वित्तीय/क्रय नियमों का अनुपालन न कर राशन किट क्रय की गईं। साथ ही 1.07 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान किया जाना पाया गया है।

  • वित्तीय नियमों के विपरीत शासकीय धनराशि 65.89 लाख रुपये का अनियमित भुगतान किया।

  • वित्तीय वर्ष 2020-21 में शासकीय धनराशि 73.79 लाख का अनियमित भुगतान किया।

  • आपूर्तिकर्ताओं को नकद भुगतान कर शासकीय धनराशि 13,36,848 रुपये का अनियमित व्यय किया गया था।

  • आयकर अधिनियम 1961 के नियम 194 के अंतर्गत स्रोत से वित्तीय वर्ष 2020-21 में आयकर धनराशि में 3.59 लाख रुपये न काटे जाने के कारण अनियमितता।

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