नैनीताल में बना देश का पहला काई गार्डन पर्यटकों के लिए खुला
अमृत विचार, हल्द्वानी। नैनीताल के सरियाताल में बने देश के पहले काई (मास) गार्डन का शुभारंभ शुक्रवार को जल पुरुष राजेंद्र सिंह व वन अनुसंधान संस्थान के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने किया। इसी के साथ ही यह गार्डन पर्यटकों व स्थानीय लोगों के लिए खोल दिया गया है। इस गार्डन में काई का …
अमृत विचार, हल्द्वानी। नैनीताल के सरियाताल में बने देश के पहले काई (मास) गार्डन का शुभारंभ शुक्रवार को जल पुरुष राजेंद्र सिंह व वन अनुसंधान संस्थान के मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने किया। इसी के साथ ही यह गार्डन पर्यटकों व स्थानीय लोगों के लिए खोल दिया गया है। इस गार्डन में काई का महत्व समझाने के लिए एक इंटरप्रीटेशन सेंटर, नेचर ट्रेल और नर्सरी बनाई गई है।
मुख्य वन संरक्षक संजीव चतुर्वेदी ने बताया कि सरियाताल में 10 हेक्टेयर वन भूमि में मास गार्डन बनाया गया है। इसमें एक हेक्टेयर में काई की 30 प्रजातियों की नर्सरी बनाई गई है। 1.25 किमी लंबी नेचर ट्रेल है जिसके दोनों तरफ काई की दर्जनों प्रजितयां लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि यह देश का पहला मास गार्डन है। इसमें एक सूचना केंद्र बनाया गया है ताकि गार्डन में आने वाले लोगों, विद्यार्थियों, शोधर्थियों, वैज्ञानिकों को इसके महत्व का पता चल सके।
जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि यह वन विभाग की सराहनीय पहल है। इससे न केवल समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करने में मदद मिलेगी बल्कि आने वाली पीढ़ी भी काई के महत्व को समझ पाएगी। इस तरह के अलग-अलग वनस्पतियों के गार्डन सिर्फ उत्तराखंड नहीं भारत के अन्य राज्यों में भी बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में प्रकृति से जनता का रिश्ता खोता जा रहा है। इस तरह की पहल से प्रकृति से हमारे रिश्ते को पुनर्जीवन देने में मदद मिलेगी। जब प्रकृति के साथ रिश्ता मजबूत होगा तो निश्चय ही राज्य की प्रगति होगी। इस दौरान मदन बिष्ट, ज्योति प्रकाश, नितिन पंत, भूपेश आदि मौजूद थे।
दुनिया में सबसे पहले हुई थी काई की उत्पत्ति
वन अनुसंधान के मुताबिक दुनिया में काई की उत्पत्ति सबसे पहले हुई थी। इस की खूबी यह है कि जिस जगह होती है उस स्थान के खनिज के अनुसार रंग ग्रहण कर लेती है। द्वितीय विश्व युद्ध में इसका उपयोग आयरलैंड के सैनिकों ने एंटीसेप्टिक के तौर पर किया था।
जापान में हैं कई मास गार्डन
जापान में मास को विशेष महत्व दिया जाता है। वहां कई मास गार्डन हैं जहां विभिन्न प्रकार की काई वनस्पतियों का प्रदर्शन किया जाता है। इधर भारत में पहला मास गार्डन उत्तराखंड के नैनीताल में बना है।
