सुधार के नाम पर उधार लेकर बंदरबांट, विद्युत कल्याण सयुंक्त समिति की संगोष्ठी में बोले हृदय नारायण दीक्षित
लखनऊ, अमृत विचार: विद्युत कल्याण सयुंक्त समिति उप्र की ओर से रविवार को डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ लोक निर्माण विभाग पर दो दिवसीय विद्युत व्यवस्था सुधार संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में ऊर्जा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र की भूमिका, के साथ देश के विभिन्न प्रांतो में ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण के हो रहे प्रयोग को पूरी तरह विफल और ऊर्जा उद्योग में सुधार की अपार संभावनाएं विषय पर व्यापक चर्चा की गई।
संगोष्ठी का उदघाटन कार्यक्रम संयोजक इंजीनियर एससी सिंह और मुख्य अतिथि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उप्र हृदय नारायण दीक्षित ने दीप प्रज्जवलित करके किया। इस मौके पर मुख्य अतिथि ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के नाम पर उधार, फिर उधार के पैसे को शीर्ष ऊर्जा प्रबंधन की ओर से बिजली खरीद से लेकर वितरण प्रणाली सहित विभिन्न मदों और निजी कंसलटेंट के माध्यम से धन बंदरबांट किया जा रहा है। यह सरकार के जीरो टॉलरेंस की नीति को प्रभावित करने के साथ ही ऊर्जा क्षेत्र के घाटे का प्रमुख कारण बन रहा है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए अखिल भारतीय डिप्लोम महासंघ के उपाध्यक्ष ई एनडी द्विवेदी ने कहा कि सरकार में बैठे कुछ ब्यूरोक्रेटस सरकार को गुमराह करके सेवा संघों और सरकार के मध्य संवाद स्थापित न होने देने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे है। इसी के चलते मुख्यमंत्री तक ऊर्जा क्षेत्र के धरातल की वास्तविक स्थितियां और ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण होने पर लोगो को होने वाली परेशानियों तक उन तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में जिन भी प्रदेशों और शहरों जैसे उड़ीसा, बिहार के भागलपुर दरभंगा, महाराष्ट्र में जलगांव औरंगाबाद,मध्यप्रदेश में उज्जैन में ऊर्जा का निजीकरण का प्रयोग किया गया, बुरी तरह विफल रहा है।
इस अवसर पर राविप जूनियर इंजीनियर्स संगठन उप्र के अध्यक्ष ई. अजय कुमार ने कहा कि घाटे के नाम पर निजीकरण सिर्फ एक बहाना है, कुछ चंद निजी पूंजीपति घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए मुनाफे में चल रहे निगमों को भी निजी हाथों में सौपा जा रहा है। इसको लेकर देश भर के बिजलीकर्मियों और बिजली उपभोक्ताओं मे व्यापक रोष है। सरकार को निजीकरण के फैसले को वापस करने पर पुनर्विचार करना होगा। वहीं भारतीय मजदूर संघ के राष्ट्रीय नेता सर्वेश द्विवेदी ने ऊर्जा क्षेत्र में निजीकरण सिर्फ उपभोक्ताओं के साथ किया जाने वाला छलावा है। साथ ही यह भारतीय संविधान के मूल्यों पर कुठाराघात है। संगोष्ठी के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
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