हल्द्वानी: अब जीआईएस सिस्टम से होगी जंगल में निगरानी
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। उत्तराखंड में पहली बार जंगलों में जल, जंगल, जमीन और जिम्मेदार (गश्ती दल) की निगरानी के लिए वन स्टाफ के मोबाइल से लेकर वन संपदा की जियो टैगिंग कराई गई है। इस जियो टैगिंग के बाद जीआईएस मैपिंग की मदद से जंगल में होने वाली हर हलचल पर नजर रखी जाएगी। इसका …
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। उत्तराखंड में पहली बार जंगलों में जल, जंगल, जमीन और जिम्मेदार (गश्ती दल) की निगरानी के लिए वन स्टाफ के मोबाइल से लेकर वन संपदा की जियो टैगिंग कराई गई है। इस जियो टैगिंग के बाद जीआईएस मैपिंग की मदद से जंगल में होने वाली हर हलचल पर नजर रखी जाएगी। इसका मकसद जंगल में निगरानी तंत्र को पैना करना है।
वन अधिकारियों के अनुसार जंगल में वन्य जीव, पौधरोपण, वन उपज और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए निगरानी तंत्र का मजबूत होना बेहद जरूरी है। आम तौर पर वन विभाग के फ्रंट लाइन वॉरियर्स बीट कर्मी, फॉरेस्ट गार्ड तैनात होते हैं। सुरक्षा का जिम्मा इन्हीं के कंधों पर होता है। लेकिन इतने बड़े जंगल में कुछ गार्ड से काम नहीं चल पाता है। इस वजह से निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए वन अफसरों ने आधुनिक तकनीकी को हथियार बनाया है।
हल्द्वानी वन प्रभाग में जंगलात में निगरानी के लिए जीआईएस मैपिंग सिस्टम अपनाया गया है। इस सिस्टम के तहत एक्सपर्ट या अफसर गूगल अर्थ की मदद से जंगल में कहीं भी हो रही हर हरकत को देख सकते हैं। अफसरों का मानना है कि इससे जंगलों में होने वाली आपराधिक गतिविधियां वन संपदा की तस्करी, वन्य जीवों के शिकार, पेड़ों के अवैध कटान आदि की रोकने में मदद मिलेगी।
ऐसे होगी जीआईएस सिस्टम से निगरानी
हल्द्वानी वन डिविजन के अंतर्गत जंगलों में मौजूद हर जल स्रोत, पौधारोपण के तहत रोपे गए हर पौधे, वन चौकियों, महत्वपूर्ण फ्लोरा फौना, नर्सरी, प्रोजेक्टस और सुरक्षा उपकरणों आदि की जियो टैगिंग की गई है। इसी जियो टैगिंग की मदद से जीआईएस मैप बनाया गया है। यह मैप हल्द्वानी वन डिविजन की हर संपत्ति और पौधे की लोकेशन दर्शाता है । जो सीधे तौर पर गूगल अर्थ से सर्च किया जा सकता है। इस तरह गूगल अर्थ की मदद से कहीं से भी बैठकर किसी भी पेड़-पौधे, वन चौकी, जल स्रोत आदि की निगरानी हो सकती है। इसकी निगरानी हो सके इसलिए हल्द्वानी वन डिविजन के ऑफिस में एक मास्टर कंट्रोल रूम बनाया गया है जहां से आईटी एक्सपर्ट जंगल में रैंडम चेकिंग करता है। वन अधिकारियों का कहना है कि इससे निगरानी में बहुत मदद मिलेगी।
ये होंगे फायदे
-जंगल की हर संपत्ति की कहीं से भी बैठकर हो सकती है निगरानी
-फॉरेस्ट गार्ड पर भी रहेगी नजर तो ड्यूटी में नहीं होगी लापरवाही
-अवैध शिकार, कटान, वन संपदा की तस्करी रोकने में भी मदद
-पौधारोपण के तहत रोपे पौधे के रखरखाव की नियमित जानकारी इससे वन संवर्द्धन होगा
क्या होता है जीआईएस सिस्टम
ज्योग्राफिकल इंफार्मेशन सिस्टम (जीआईएस), रिमोट सेंसिंग, डिजिटल तकनीक व हाइटेक विधियों से पुराने व नए आंकड़ों को संशोधित एवं प्रदर्शित करता है। इस सिस्टम की मदद से पृथ्वी की भौगोलिक आकृतियों, भू भागों को डिजिटल रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह एक हाईटेक तकनीकी है, जिसमें किसी भी डाटा को एनालॉग से डिजिटल तकनीक में बदला जाता है। इससे प्राप्त मानचित्रों को हाईटेक मानचित्र कहते हैं।
हमने जंगल में निगरानी के लिए प्रत्येक जल स्रोत, वन संपदा, वन चौकियां, पौधरोपण में लगाए गए पौधे आदि की जियो टैगिंग कराई है। फिर जीआईएस मैपिंग सिस्टम के जरिए गूगल अर्थ से इनकी निगरानी कर सकते हैं। इनकी नियमित निगरानी हो इसके लिए एक एक्सपर्ट को भी नियुक्त किया गया है। –कुंदन कुमार, डीएफओ, हल्द्वानी फॉरेस्ट डिविजन
