हल्द्वानी: वन विभाग के साथ मिलकर काम करेगा पशुपालन विभाग, पालतू पशुओं का होगा बीमा
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। उत्तराखंड में पहली बार वन विभाग ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर बीमे की पहल की है। इसके तहत वन्य जीवन संघर्ष या बीमारी से पशु की मौत होने पर पशुपालकों को वन विभाग से मुआवजे के साथ ही अब बीमे की रकम भी मिलेगी। पशुओं का बीमा करवाने की राज्य में …
अंकुर शर्मा, हल्द्वानी। उत्तराखंड में पहली बार वन विभाग ने पशुपालन विभाग के साथ मिलकर बीमे की पहल की है। इसके तहत वन्य जीवन संघर्ष या बीमारी से पशु की मौत होने पर पशुपालकों को वन विभाग से मुआवजे के साथ ही अब बीमे की रकम भी मिलेगी। पशुओं का बीमा करवाने की राज्य में विभाग ने शुरुआत कर दी है।
प्रारंभिक चरण में इसके लिए हल्द्वानी वन प्रभाग की नंधौर वन्य जीव अभ्यारण्य से सटे गांवों को चुना गया है। योजना सफल होने पर इसे राज्य के अन्य हिस्सों में भी शुरू कर दिया जाएगा। पशुपालन विभाग से बीमा करवाने पर किसी भी किस्म (बीमारी या शिकार) से पशु क्षति होने पर पशुपालक को केवल पशु का मूल्य मिलता है। अब पशुपालक को यह फायदा होगा कि क्षतिपूर्ति के साथ ही पशुपालक को बीमे की रकम भी मिलेगी और उनका आर्थिक नुकसान नहीं होगा।
डब्लूडब्लूएफ देगा बीमा किस्त की 50 फीसदी रकम
वैसे तो पशुपालन विभाग से बीमा कराने पर किस्त की कुछ रकम राज्य सरकार की ओर से दी जाती है। किस्त की जो बाकी रकम है उस राशि का भी 50 फीसदी डब्लूडब्लूएफ (वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर) भुगतान देगी। इस तरह बेहद कम खर्च में पशुपालक को बीमा की सुविधा मिलेगी।
दिसंबर के पहले हफ्ते में लगेंगे कैंप
वन विभाग ने शुरुआती चरण में हल्द्वानी वन डिविजन की नंधौर अभ्यारण्य के छह गांवों को चिन्हित किया है। इनमें दिसंबर के पहले हफ्ते वन और पशुपालन विभाग संयुक्त कार्यशाला आयोजित कर पशुपालकों को बीमा के फायदे बताएगा और प्रेरित करेगा कि वे पशुओं का बीमा कराएं। ताकि उन्हें रकम का फायदा मिल सकें। इनमें छकाता रेंज के खेड़ा, कालूखेड़ा, शारदा रेंज के आमबाग, बसिया, नंधौर रेंज के लाखनमंडी, ककोड़ शामिल हैं।
पशुपालन विभाग की मदद से पालतू पशुओं गाय, भैंस, बकरी, भेड़, घोड़े वगैरह का बीमा कराया जाएगा। बीमा प्रीमियम की 50 फीसदी रकम का भुगतान डब्लूडब्लूएफ करेगा। इससे पशुपालक का नुकसान नहीं होगा। -कुंदन कुमार, डीएफओ, हल्द्वानी वन विभाग
