बरेली: कोविड-19 की भेंट चढ़ा उत्तरायणी मेला
बरेली, अमृत विचार। बरेली का प्रसिद्ध उत्तरायणी मेला कोरोना की भेंट चढ़ गया है। इस बार कोरोना को देखते हुए उत्तरायणी मेले के आयोजन को निरस्त कर दिया गया है। रविवार को मेले के आयोजन को लेकर उत्तरायणी जन कल्याण समिति की एक बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से इस बार मेले का आयोजन न किए …
बरेली, अमृत विचार। बरेली का प्रसिद्ध उत्तरायणी मेला कोरोना की भेंट चढ़ गया है। इस बार कोरोना को देखते हुए उत्तरायणी मेले के आयोजन को निरस्त कर दिया गया है। रविवार को मेले के आयोजन को लेकर उत्तरायणी जन कल्याण समिति की एक बैठक हुई जिसमें सर्वसम्मति से इस बार मेले का आयोजन न किए जाने पर सहमति बनाई गई।
पिछले 27 सालों से छौलिया नृत्य समेत पहाड़ की संस्कृति और लोककला लोगों को लुभाने वाला उत्तरायणी मेला नहीं लगेगा। इसमें उत्तराखंड की कला, संस्कृति और लोकगीत, नृत्य की झांकी देखने को मिलती है। उत्तरायणी जन कल्याण समिति अध्यक्ष पीसी पाठक ने बताया कि कोरोना काल को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
बताया कि जिला प्रशासन ने चौबारी मेले पर भी रोक लगा दी है। ऐसे में अगर हम जिला प्रशासन के पास जाकर अनुमति मांगते तो वह कम लोगों की ही अनुमति देते जबकि मेले में लाखों लोग आते हैं। मेले में करीब 150 स्टॉल लगते हैं जिसमें कोलकाता, जयपुर, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, नेपाल समेत उत्तराखंड से 70 और 20 के करीब स्थानीय स्टॉल लगती हैं।
इस मौके पर महासचिव बीसी पांडेय, कोषाध्यक्ष बीसी पांडे, केपी बिष्ट, आनंद भंडारी, प्रमोद बिष्ट, नितिन वर्मा, देवेंद्र जोशी, भुवन पांडेय, रमेश शर्मा, डीडी बेलवाल, भवानी दत्त जोशी आदि मौजूद रहे।
27 वर्ष पुराना है उत्तरायणी मेले का इतिहास
समिति के अध्यक्ष पीसी पाठक ने बताया कि 27 वर्ष पहले उत्तरायणी मेले का संजय कम्युनिटी हॉल में हुआ था। इसके बाद यह कार्यक्रम बड़ा रूप लेता गया, जिसके बाद यह मेला नेहरू युवा केंद्र में लगना शुरू हुआ और इसके बाद यह मेला बरेली क्लब में लगना शुरू हुआ।
