उधम सिंह नगर: बाजपुर के जनकवि बल्ली सिंह चीमा को साहित्य शिरोमणि पुरस्कार

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बाजपुर,अमृत विचार। प्रसिद्ध जनकवि बल्ली सिंह चीमा उर्फ बल्ली को पंजाब सरकार के भाषा विभाग ने वर्ष-2018 के साहित्य शिरोमणि पुरस्कार के लिए चयनित किया है। इस पुरस्कार के तहत प्रमाण पत्र के साथ ही 5 लाख रुपये की नगदी भी दी जाती है। पंजाब सरकार के भाषा विभाग ने 18 अलग-अलग वर्गों के लिए …

बाजपुर,अमृत विचार। प्रसिद्ध जनकवि बल्ली सिंह चीमा उर्फ बल्ली को पंजाब सरकार के भाषा विभाग ने वर्ष-2018 के साहित्य शिरोमणि पुरस्कार के लिए चयनित किया है। इस पुरस्कार के तहत प्रमाण पत्र के साथ ही 5 लाख रुपये की नगदी भी दी जाती है।

पंजाब सरकार के भाषा विभाग ने 18 अलग-अलग वर्गों के लिए साहित्य रत्न और शिरोमणि पुरस्कारों का ऐलान किया है। जिनमें शिरोमणि हिंदी साहित्यकार का पुरस्कार बल्ली सिंह चीमा को प्रदान किया जाएगा।

पंजाब की धरती पर जन्मे और तराई को आबाद करने वाले लेखनी के धनी किसान पुत्र बल्ली सिंह चीमा को राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है। पंजाब सरकार ने पिछले पांच वर्षों से लंबित पुरस्कारों में वर्ष 2018 के साहित्य शिरोमणि पुरस्कार के लिए बल्ली सिंह चीमा को चुना है। बीते 3 दिसंबर को पुरस्कारों के लिए नामों का ऐलान किया गया। चीमा को साहित्य शिरोमणि पुरस्कार मिलने पर तमाम लोगों ने उन्हें बधाई दी है।

बताते दें कुमाऊं की तराई के एक छोटे से गांव बख्शी पीर मढ़ैया में रहकर खेती-किसानी करने वाले जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने साधारण जन और उसकी मिट्टी को अपनी कविता का विषय बनाया है। उनके लिखे गीतों और गजलों को देशभर के मजदूर-किसान आंदोलनों में गाया जाता रहा है।

पंजाब में शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं चीमा
तराई के किसान बल्ली सिंह चीमा का जन्म 2 सितंबर 1952 में चीमा खुर्द अमृतसर पंजाब में हुआ था। कक्षा तीन तक की शिक्षा उन्होंने गांव में ही हासिल की। इसके पश्चात उनका परिवार बाजपुर आ गया। हाईस्कूल की शिक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात चीमा उच्च शिक्षा के लिए पुन: पंजाब चले गए। इस दौरान उन्होंने गजल, कविता आदि गीतों को पंजाब ही नहीं देश के अन्य राज्यों में भी स्कूली कार्यक्रमों में प्रस्तुत किया। उच्च शिक्षा के बाद चीमा पुन: बाजपुर आ गए और 1980 से उन्होंने जनवादी गीत लिखना शुरू कर दिया। उनके लिखा प्रसिद्ध गीत ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के… सरकारी कार्यक्रमों के साथ ही आंदोलनों का भी हिस्सा बनने लगा। उनकी लगभग एक दर्जन कविताएं ऐसी हैं जो आज भी विभिन्न मंचों पर प्रस्तुत की जाती हैं।

अब तक प्रकाशित हो चुके हैं पांच कविता और गजल संग्रह
बल्ली सिंह चीमा ने बताया कि उनकी अब तक पांच कविता और गजल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें खामोशी के खिलाफ, जमीन से उठती आवाज, तय करो किस ओर हो, हादसा क्या चीज है तथा उजालों को खबर कर दो शामिल हैं। इनमें समाहित कविताएं और गजलें ऐसी हैं जिन्हें पढ़ने और सुनने से मन में जोश और जज्बे का भाव पैदा होता है।

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