बरेली: स्नातक के विद्यार्थियों को एकीकृत पीएचडी कराने की तैयारी
बरेली,अमृत विचार। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातक और परास्नातक स्तर पर पढ़ाई में कई बदलाव किए जा रहे हैं। नया पाठ्यक्रम रोजगारपरक होना भी जरूरी है। इसी के तहत शासन ने सभी विश्वविद्यालयों को नई शोध नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब स्नातक स्तर पर ही एकीकृत पीएचडी कराने …
बरेली,अमृत विचार। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्नातक और परास्नातक स्तर पर पढ़ाई में कई बदलाव किए जा रहे हैं। नया पाठ्यक्रम रोजगारपरक होना भी जरूरी है। इसी के तहत शासन ने सभी विश्वविद्यालयों को नई शोध नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अब स्नातक स्तर पर ही एकीकृत पीएचडी कराने की तैयारी की जा रही है।
अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत स्नातक स्तर पर अनुसंधान के साथ-साथ प्रशिक्षण का समावेश होना जरूरी है। एक दिन पहले ही रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने कार्य परिषद की बैठक में शोध निदेशालय को अनुमोदन दिया है।
अपर मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए हैं कि अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए उच्च शिक्षण संस्थान की बहुआयामी प्रकृति पर जोर देना चाहिए। इसके अलावा एकीकृत पीएचडी शुरू करने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। शोध में रुचि रखने वाले और क्षमतायुक्त स्नातकों को उनकी रुचि के विषयों में एकीकृत पीएचडी कराने की अनुमति दी जा सकती है। यह विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर और पीएचडी की दोहरी डिग्री प्रदान करेगा। इससे विद्यार्थियों को कैरियर में काफी लाभ मिलेगा।
एकीकृत पीएचडी से बाहर निकलने का विकल्प भी दिया जाएगा। इसके लिए विश्वविद्यालय अंशकालिक पीएचडी की भी शुरुआत कर सकते हैं। साथ ही काम करने वाले नौकरीपेशा लोगों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। वहीं, महाविद्यालयों में भी ग्रास रूट इनोवेशन सेंटर की स्थापना की जा सकती है। इस सेंटर के जरिए 12वीं के बाद स्नातक में पढ़ने के लिए आने वाले विद्यार्थियों के विचारों की व्यावहारिकता के बारे में पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे छात्र जो उद्यमिता के क्षेत्र में विकास करना चाहते हैं उन्हें स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश यानी अंतराल वर्ष लेने की अनुमति दी जाएगी।
मंगलवार को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विश्वविद्यालय में शोध निदेशालय बनाने को कार्य परिषद ने अनमुति दी है। यह निदेशालय विश्वविद्यालय में प्रवेश से लेकर पीएचडी उपाधि अवार्ड होने तक सभी गतिविधियों, शोध प्रयोजनों का संचालन तथा विभिन्न शोध संस्थानों के साथ समन्वय तथा संबंद्ध महाविद्यालयों में शोध कार्यों का बढ़ावा देने का कार्य करेगा। नई शिक्षा नीति के तहत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, क्लाउड कम्प्यूटिंग व पूर्व छात्र परिषद समेत कई अन्य को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्य परिषद की बैठक में इन्हें भी अनुमति दी गई है।
